मुनिश्री ने कहा कि जीव के कुसंस्कार होने पर उसे उत्तम निमित्त मिल जाएं, तब भी कुछ नहीं हो सकता। कुसंस्कार जीव को अनाचार ध्यान की ओर प्रेरित करते हैं। अनाचार ध्यान के सेवन के कारण उत्तम निमित्त भी फलीभूत नहीं हो पाते। इसलिए अनाचार ध्यान का विचार मन में आए तो उसे टालने का प्रयास करना चाहिए और जीवन में ऐसे निमित्त मिलें तो उनसे दूरी बनाना ही बुद्धिमानी है।