कच्चे तेल की कीमत
यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और गैस पर पाबंदी लगाई तो रूस ने भारत और चीन को डिस्काउंट पर तेल बेचना शुरू किया था। देखते-देखते रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया। लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने हाल में रूसी तेल की खरीद कम की थी लेकिन वह अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिकी छूट के बाद से भारतीय कंपनियां 30 मिलियन बैरल से अधिक रूसी क्रूड खरीदा है।शुक्रवार को कच्चा तेल तेजी के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड 2.68 डॉलर यानी 2.67 फीसदी तेजी के साथ 103.1 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.11 फीसदी तेजी के साथ 98.71 डॉलर पर पहुंच गया। इस बीच अमेरिका ने ईरान के खर्ग आइलैंड में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान नहीं माना तो उसके तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे आगे तेल की कीमत और बढ़ सकती है।


