ट्रंप के इस नियम ने भारतीयों को फंसाया
जुलाई में विदेश विभाग ने घोषणा की थी कि H1-B धारक और H-4 वीजा पर उनके आश्रित 2 सितम्बर से अपने दस्तावेजों को दूर से या किसी तीसरे देश में रिन्यू नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें अपने देश लौटना होगा। 19 सितम्बर को ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए जिसमें नए H-1B आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क अनिवार्य कर दिया गया। 3 दिसम्बर को ट्रंप प्रशासन ने नई घोषणा में जिसमें H-1B वीजा और उनके आश्रितों के लिए विस्तारिक स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया की बात कही। इसमें उनकी ऑनलाइट प्लेटफॉर्म पर समीक्षा भी शामिल है।अचानक मेल पर कैंसल हुए अपॉइंटमेंट
अगले कुछ दिनों में दिसम्बर के मध्य से आखिर में रिन्यू होने वाले अपॉइंट को विदेश विभाग से मेल मिलने शुरू हो गए। इसमें कहा गया कि ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण कांसुलेट को हर दिन लिए जाने वाले अपॉइंटमेंट की संख्या कम करनी पड़ी है। वकीलों ने कहा कि ज्यादातर अपॉइंटमेंट मार्च और जून के बीच रीशेड्यूल किए जा रहे हैं। एक आवेदक को तो 2027 की तारीख दी गई है।भारतीय इंजीनियर ने बताया दर्द
डेट्रॉइट में रहने वाले एक भारतीय इंजीनियर ने बताया कि वह दिसम्बर की शुरुआत में एक शादी के लिए भारत गए थे। उन्होंने अपना H-1B वीजा रिन्यू कराने के लिए 17 और 23 दिसम्बर को काउंसलर अपॉइंटमेंट तय किया था, जो अब खत्म हो चुका है। उन्हें 8 दिसम्बर को कई ईमेल मिले जिसमें बताया गया कि उनका अपॉइंटमेंट कैंसल कर दिया गया है और 2 जुलाई के लिए रीशेड्यूल किया गया है- यानी छह महीने से भी ज्यादा समय बाद। उनकी पत्नी अमेरिका में अपने H-1B वीजा पर हैं।इस इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी कंपनी ने यह दिखाने वाले दस्तावेज जमा किए कि वह जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, वे अगले साल तेजी से आगे बढ़ेंगे। इसके बाद उन्हें एक जल्द अपॉइंटमेंट मिल गया है। हालांकि, अभी भी उन्हें डर बना हुआ है। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे और अब आगे नहीं बढ़ाएंगे। इंजीनियर ने H-1B प्रोग्राम में बदलाव को गलत बताया और कहा कि अगर H-1B पर काम करने वाले लोगों को अचानक पलायन होता है तो बहुत सारी कंपनियां बर्बाद हो जाएंगी।


