बांग्लादेश का पद्मा बैराज मेगा प्रोजेक्ट क्या है? तारिक सरकार बता रही भारत का जवाब, एक्सपर्ट ने कहा खतरा
Updated on
14-05-2026 04:37 PM
ढाका: बांग्लादेश और भारत के बीच नदी के पानी के बंटवारे का मसला अब नए मोड़ की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने पद्मा नदी पर एक विशाल बैराज पाने के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। ढाका ने इसे ऐसा कदम बताया है, जिसका मकसद नदी के भारत वाले हिस्से में बने फरक्का बैराज के असर का मुकाबला करना है। पद्मा नदी को भारत में गंगा के नाम से जाना जाता है।
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी का बंटवारा दशकों से विवाद का विषय रहा है। दोनों देशों के लिए नदी के पानी बंटवारे के लिए एक संधि आखिरी दौर में गुजर रही है, जो इसी साल दिसम्बर में खत्म हो रही है। अभी तक संधि को आगे बढ़ाने पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच संधि के खत्म होने तारीख नजदीक आने के साथ ही तारिक रहमान सरकार ने पद्मा बैराज को मंजूरी दे दी।
तारिक रहमान सरकार ने दी प्रोजेक्ट को मंजूरी
तारिक रहमान सरकार ने 13 अप्रैल को इस मेगा प्रोजेक्ट के पहले चरण को मंजूरी दी है, जिस पर 34497 करोड़ टका अनुमानित लागत आएगी। यह 28 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी ने प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य बांग्लादेश की तरफ पानी जमा करना है, ताकि गंगा नदी पर फरक्का बैराज के असर को खत्म किया जा सके।
खास बात है कि बांग्लादेश ने भारत से जाने वाली नदी पर बैराज बनाने को लेकर भारत के साथ कोई चर्चा नहीं की है। शाहिदुद्दीन ने इस बैराज को राष्ट्रीय हित का प्रोजेक्ट बताया और कहा कि इस मुद्दे भारत के साथ किसी भी तरह की बातचीत की जरूरत नहीं है।
पद्मा बैराज प्रोजेक्ट क्या है?
बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी ने बताया कि पद्दा बैराज प्रोजेक्ट से देश के एक तिहाई भूभाग और 7 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।
बांग्लादेश के योजना आयोग के अनुसार, यह परियोजना खुलना, ढाका, राजशाही और बारीसाल संभागों के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों को कवर करेगी।
प्रोजेक्ट का उद्देश्य प्रमुख नदियों के प्रवाह को बहाल करना है, जिसमें हिस्ना-माथाभंगा, गोराई-मधुमती, चंदना-बाराशिया, बराल और इचामती नदियां शामिल हैं।
इस प्रोजेक्ट से दक्षिण-पश्चिम, मध्य-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम के इलाकों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है।
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