दिल्ली के बीकानेर हाउस में प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 70 से ज्यादा तस्वीरें हटा दी गईं। इनमें दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें भी शामिल थीं।

रेहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उनकी सोलो एग्जीबिशन ‘नो आइडिया इज फाइनल’ शुरू होने से कुछ घंटे पहले तस्वीरें हटाई गईं। प्रदर्शनी में पहले 100 से ज्यादा तस्वीरें थीं। अब करीब 40 बची हैं।

रेहान ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक माहौल का हवाला दिया गया, जबकि तस्वीरों में कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। उन्होंने कहा- कलाकारों के काम को सेंसर किया जा रहा है। इस मामले में बीकानेर हाउस की ओर से कोई बयान नहीं आया है।


रेहान बोले- प्रदर्शनी का लेआउट मैनेजमेंट को पहले बताया था

रेहान ने बताया कि बुधवार दोपहर 3:30 बजे उनसे कहा गया कि शाम 5 बजे तक तस्वीरें नहीं हटाईं तो प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी।

उनके मुताबिक, प्रदर्शनी का प्रस्ताव और लेआउट पहले ही प्रबंधन को दिया जा चुका था। उन्होंने कहा कि तस्वीरें पिछले छह महीनों में हुए प्रदर्शनों का दस्तावेज थीं।

रेहान ने कहा- मुझे नहीं पता कि वे किससे डरे हुए हैं और तिरंगा की फोटो तक हटाने की हद तक चले गए, लेकिन मैं तिरंगे के फोटो नहीं हटाऊंगा। प्रदर्शनी रविवार तक तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।


प्रियंका बोलीं- आज उसकी, कल किसी और की बारी

प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम को हास्यास्पद बताया। उन्होंने इसे देशभर के युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश बताया।

प्रियंका ने कहा- उसकी तस्वीरें प्रदर्शनों की थीं। उनमें कोई टिप्पणी नहीं थी। किसी के खिलाफ अपमानजनक बात नहीं थी।


रेहान ने दिल्ली प्रदर्शनों की फोटो खींचीं, राहुल भी नजर आए

रेहान वाड्रा की फोटो सीरीज में दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दृश्य दर्ज हैं। तस्वीरों में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और प्रदर्शन के दौरान बने तनावपूर्ण माहौल को दिखाया गया है। एक तस्वीर में राहुल गांधी भी प्रदर्शनकारियों के बीच नजर आ रहे हैं।

ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए थे। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए SIR के बदलाव वापस लेने की मांग की थी।


कलाकारों और संस्थाओं के क्या अधिकार हैं, 4 पॉइंट्स में समझें

  • भारत में कला पर रोक सिर्फ कानून के जरिए नहीं लगती। कई बार संस्थाएं और बाजार के दबाव भी कलाकारों की आजादी को प्रभावित करते हैं। विवाद से बचने के लिए कुछ संस्थाएं खुद ही कलाकृतियां हटा देती हैं या कलाकार अपनी बात कहने से बचते हैं।

  • फिल्मों की तरह कला प्रदर्शनियों के लिए कोई केंद्रीय सेंसर बोर्ड नहीं है। फिर भी, धार्मिक भावनाएं आहत करने या अश्लीलता के आरोप में कलाकारों को कानूनी कार्रवाई और विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत कलाकारों को अपनी बात कहने और विचार जाहिर करने की आजादी है, लेकिन इस आजादी की भी कुछ सीमाएं हैं।

  • अनुच्छेद 19(2) के तहत देश की सुरक्षा, शांति-व्यवस्था और नैतिकता जैसे कारणों से सरकार इस पर उचित पाबंदियां लगा सकती है।

रेहान विजुअल आर्टिस्ट और फोटोग्राफर हैं


राहुल गांधी ने मंगलवार को RSS को पुरुषों का, संविधान विरोधी पंथ बताया। X पर पोस्ट में राहुल ने कहा कि RSS का मानना है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति हैं। मैं शिव-शक्ति में भरोसा करता हूं। इसलिए उनके खिलाफ लड़ने में मुझे इतनी खुशी मिलती है।