निवाड़ी। समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने कार्यों से केवल अपनी पहचान ही नहीं बनाते, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव की नई इबारत लिखते हैं। ऐसी ही बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं डॉ. संगीता राय, जिन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सेवा, सामाजिक समरसता और शिक्षक हितों के क्षेत्र में अपने समर्पण एवं सक्रिय भूमिका से एक अलग पहचान स्थापित की है।
शिक्षिका के रूप में डॉ. संगीता राय विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही हैं, वहीं समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। वीर भूमि महिला एवं बाल कल्याण सेवा समिति की संस्थापिका के रूप में उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कल्याण, उनके अधिकारों तथा नारी सशक्तिकरण के लिए एक सशक्त मंच तैयार किया है। उनकी कार्यशैली में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष के संस्कारों की झलक दिखाई देती है।
डॉ. राय अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा में महिला कार्यकारी अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन करते हुए सामाजिक एकता और संगठन को मजबूती प्रदान करने में सक्रिय हैं। वहीं भारतीय सद्भावना मंच के माध्यम से सामाजिक भाईचारे, आपसी सौहार्द और सद्भावना का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। इसके साथ ही अन्तर्जनपदीय शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन में शिक्षकों के हितों और अधिकारों के लिए भी उनकी सक्रिय भूमिका बनी हुई है।
उनकी विशेषता यह है कि वे अपने दायित्वों को केवल पद तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि समाज के बीच पहुंचकर लोगों को जोड़ने, जागरूक करने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने का प्रयास करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र से लेकर सामाजिक संगठनों तक उनकी सक्रियता उन्हें एक कर्मठ शिक्षिका, संवेदनशील समाजसेविका और प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है।
डॉ. संगीता राय ने कहा कि मेरे लिए शिक्षा और समाजसेवा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। एक शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी है। मेरा हमेशा प्रयास रहा है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के साथ-साथ बच्चों को बेहतर भविष्य मिले तथा समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना मजबूत हो। समाज ने मुझे जो सम्मान और जिम्मेदारियां दी हैं, उन्हें पूरी निष्ठा से निभाना ही मेरा संकल्प है। जब तक सामर्थ्य है, शिक्षा, महिला कल्याण और समाजहित के कार्यों में निरंतर योगदान देती रहूंगी।"
निस्संदेह, डॉ. संगीता राय का व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो और उद्देश्य समाज का कल्याण हो, तो एक व्यक्ति अनेक क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। उनके प्रयास संपूर्ण बुंदेलखंड के लिए प्रेरणादायी हैं। निवाड़ी में डॉ. संगीता राय की सक्रियता से गरमाया सियासी माहौल, क्या विधानसभा चुनाव में आजमाएंगी किस्मत?
गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और राजनीतिक लोगों से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज, चुनाव लड़ने के सवाल पर बोलीं– जैसी प्रभु राम राजा की इच्छा
निवाड़ी जिले में इन दिनों समाजसेविका एवं शिक्षिका डॉ. संगीता राय के दौरे और उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ मुलाकातों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। निवाड़ी आगमन के दौरान उन्होंने जिले के गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों से मुलाकात की। उनकी इन मुलाकातों को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या डॉ. संगीता राय आगामी विधानसभा चुनाव में निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकती हैं? हालांकि अभी तक उनकी ओर से चुनाव लड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही मुलाकातों ने सियासी चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
डॉ. संगीता राय शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी सक्रिय पहचान रखती हैं। वीर भूमि महिला एवं बाल कल्याण सेवा समिति की संस्थापिका होने के साथ ही वे अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा में महिला कार्यकारी अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। इसके अलावा भारतीय सद्भावना मंच और शिक्षक संगठनों के माध्यम से भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
निवाड़ी में पत्रकारों से हुई चर्चा के दौरान जब उनसे विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए संक्षिप्त लेकिन सियासी मायने रखने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा— जैसी प्रभु राम राजा की इच्छा।
उनके इस जवाब ने चर्चाओं को और दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक जानकारों और स्थानीय लोगों के बीच अब इस बात को लेकर उत्सुकता है कि क्या डॉ. संगीता राय की निवाड़ी में बढ़ती सक्रियता महज सामाजिक संपर्क और जनसेवा का हिस्सा है या इसके पीछे भविष्य की कोई राजनीतिक रणनीति भी है।
फिलहाल डॉ. संगीता राय ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन उनके एक छोटे से बयान ने निवाड़ी की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में उनकी भूमिका क्या होगी, यह तो वक्त ही बताएगा।