रुपया बनाम डॉलर
आज से 100 साल पहले यानी 1925 में रुपया डॉलर से काफी मजबूत था क्योंकि तब यह ब्रिटिश करेंसी से जुड़ा था। bookmyforex.com के मुताबिक तब एक रुपया 10 डॉलर के बराबर था। 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो एक डॉलर 3.3 रुपये के बराबर था। 1950 आते-आते एक डॉलर की कीमत 4.76 रुपये हो गई। 1965 तक यह इसी स्तर पर रहा लेकिन अगले साल यानी 1966 में रुपया डॉलर के मुकाबले 7.5 के स्तर पर आ गया।1980 में यह डॉलर के मुकाबले 7.86 पर था और 1990 में 17.5 तक आ गया। साल 2000 आते-आते एक डॉलर की कीमत 44.94 रुपये पहुंच गई। 2010 में एक डॉलर की कीमत 45.73 रुपये थी जबकि 2020 तक यह 76.38 पर आ गया। रुपये को डॉलर के मुताबिक 65 से 70 तक पहुंचने में 1815 दिन लगे थे। उसके बाद 70 से 75 पहुंचने में इसने 581 दिन लिए थे। 75 से 80 के स्तर पर यह 917 दिन में पहुंचा था और फिर 819 दिन में यह 80 से 85 तक पहुंचा था। 85 से 90 पहुंचने में इसने 349 दिन लगाए और 90 से 91 यह 13 दिन में ही पहुंच गया।
डॉलर से मजबूत करेंसीज
अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और उसकी करेंसी डॉलर की पहचान एक ग्लोबल करेंसी के रूप में है। करीब 80 साल से पूरी दुनिया में डॉलर का डंका बज रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में यह दुनियाभर में स्वीकार्य है। साथ ही दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के पास जो विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व है, उसमें बहुत बड़ा हिस्सा डॉलर का है। वैसे तो यूरो दुनिया की दूसरी बड़ी करेंसी है लेकिन यह डॉलर के मुकाबले कहीं नहीं है। डॉलर अमेरिका की मजबूती और उसकी अर्थव्यवस्था की ताकत का प्रतीक है।लेकिन दुनिया में नौ करेंसी डॉलर से ज्यादा मजबूत है। इस लिस्ट में पहले नंबर पर कुवैती दीनार है। एक कुवैती दीनार की कीमत 3.25 डॉलर के बराबर है। दूसरे नंबर पर बहरीनी दीनार है जो 2.65 डॉलर के बराबर है। ओमानी रियाल की कीमत भी अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा है। अभी एक ओमानी रियाल की कीमत 2.60 अमेरिकी डॉलर के बराबर है। इसी तरह जॉर्डन की करेंसी दीनार, ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग, जिब्राल्टर पाउंड, कैमेन आइलैंड डॉलर, स्विस फ्रैंक और यूरो भी डॉलर से मजबूत हैं।


