शेयर मार्केट का रेकॉर्ड हाई देख आपको भी निवेश से डर लग रहा है? जानिए एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं
Updated on
05-07-2024 04:34 PM
नई दिल्ली: सेंसेक्स ने नया रेकॉर्ड बनाया है। बीएसई का सेंसेक्स कल ही पहली बार 80,000 अंक के ऊपर बंद हुआ। ऐसे में रिटेल इनवेस्टर्स परेशान हैं। वे मार्केट में नया निवेश करने से डर रहे हैं। आप भी इसी तरह की बातें सोच रहे हैं? क्या आपको करेक्शन का इंतजार करना चाहिए? हम इन्हीं बातों के बारे में आज बात करेंगे।
लगतार निवेश समझदार नीति
हमारे सहयोगी इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप पिछले रेकॉर्ड देखें, तो 50,000 और 75,000 के लेवल पर सेंसेक्स पहुंचा था तो ये खरीदने के मौके थे। आपको डबल डिजिट में मुनाफा होता, अगर आप पहले के 'रेकॉर्ड हाई' लेवल पर खरीदते। एक्सपर्ट का कहना है कि 70,000 से 80,000 का 10,000 अंकों का उछाल 14.4% की ग्रोथ को दिखाता है। 80,000 से 90,000 तक पहुंचने के लिए महज 12.5% की बढ़ोतरी चाहिए। नए हाई के बावजूद लगातार निवेश करना एक समझदार नीति है।
क्यों डरते हैं छोटे निवेशक?
Samco Securities के हेड (मार्केट परस्पेक्टिव एंड रिसर्च) अपूर्व सेठ का कहना है कि पिछले 8 वर्षों में हर कैलेंडर ईयर में मार्केट ने एक नया ऑल-टाइम हाई बनाया है। इस साल 2024 में ही सेंसेक्स 25 बार नए लाइफ-टाइम हाई पर बंद हुआ है। हालांकि जब मार्केट नए हाई पर ट्रेड कर रहा हो, तो निवेश करना डरावना लग सकता है। लेकिन अगर आप सही मौके का इंतजार करते रहे तो आप बाहर ही रह जाते हैं।
आखिर निवेश कहां करें?
अहम सवाल ये है कि आप कहां निवेश करें? बैंक ऑफ बड़ौदा के हेड (वेल्थ मैनेजमेंट और कैपिटल मार्केट्स) वीरेंद्र सोमवंशी का कहना है कि लार्ज कैप के लिए वैल्यूएशन ज्यादा अच्छी हैं, क्योंकि मिड और स्मॉल कैप की कीमतें उनके लंबे समय के औसत से अधिक हैं। अभी के बाजार में हम लार्ज-कैप पर ज्यादा ध्यान देने वाली फ्लेक्सी-कैप स्ट्रैटजी में निवेश करना पसंद करेंगे। साथ ही मिड और स्मॉल कैप में भी रणनीतिक रूप से निवेश करेंगे। उन्होंने कहा कि निवेशकों को कम से कम 5 साल के लिए और थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना चाहिए।
कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
अपूर्व सेठ का कहना है कि शेयरों की कीमतों को आइसोलेशन में नहीं देखना चाहिए। उनकी वैल्यूशन या भविष्य की कमाई के लिए आप कितना पे करते हैं, वो एक अहम फैक्टर है। वेल मैनेज्ड कंपनियां सेंसेक्स की तुलना में ज्यादा बढ़ती हैं। अगर इकॉनमी में डिमांड बढ़ रही है, तो अच्छी तरह से चलाई जाने वाली कंपनियों का मुनाफा बढ़ने की संभावना होती है। और अगर मुनाफा बढ़ता है तो शेयरों की कीमतें भी बढ़ेंगी।
फंडामेंटल सपोर्ट है वजह?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का कहना है कि बाजार की इस बढ़त के पीछे फंडामेंटल सपोर्ट है। अगर हम FY25 में 7% से अधिक GDP ग्रोथ हासिल करते हैं, तो भारत लगातार 4 साल तक 7% ग्रोथ दर्ज करेगा। कॉरपोरेट अर्निंग भी अच्छी है। FY24 में निफ्टी की अर्निंग 24% की दर से बढ़ रही है। बाजार में सबसे बड़ा जोखिम हाई वैल्यूएशन है। एक और जोखिम ये है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में वापस आते हैं, तो अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर तेज होगा।
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