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“स्वच्छ सुपर लीग” में शामिल होने जुट गया भोपाल : आदमपुर कचरा खंती खत्म करने की तैयारी, गन्ने के छिलकों से बन रही CNG

Updated on 19-05-2026 11:46 AM

भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण में देशभर में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद अब भोपाल नगर निगम “स्वच्छ सुपर लीग” में जगह बनाने की तैयारी में जुट गया है इसके लिए नगर निगम ने कई ऐसे नवाचार शुरू किए हैं, जो देशभर के शहरों के लिए मॉडल बन सकते हैं।

नगर निगम अब भानपुर के बाद आदमपुर कचरा खंती में जमा कचरे के पहाड़ को खत्म करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

वहीं, धूल नियंत्रण के लिए कचरा वाहनों पर स्प्रिंकलर सिस्टम, गन्ने के छिलकों से सीएनजी निर्माण और अलग-अलग वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शहर को नई पहचान दे रहे हैं।

700 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निपटारे की शुरुआत

आदमपुर कचरा खंती में जमा लगभग 700 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यहां नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) सूखे कचरे से टोरिफाइड चारकोल तैयार कर रहा है।

प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे के निस्तारण की क्षमता वाला यह प्लांट शहर को सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।

निगम प्रशासन का दावा है कि 330 दिनों के भीतर आदमपुर खंती के कचरे के पहाड़ को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

धूल नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलर और एनसीएपी पर फोकस

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत नगर निगम सड़कों और कचरा कलेक्शन के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।

डोर-टू-डोर कचरा वाहनों में स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जो कचरा डालते समय पानी का छिड़काव करते हैं। इसके अलावा सड़क किनारों पर पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, ताकि धूल कम उड़ सके।

मेट्रो, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी जैसी एजेंसियों को भी निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं।

रोज 850 टन कचरे का प्रबंधन

भोपाल को पहले ही “सात-स्टार गार्बेज फ्री सिटी” और “वाटर प्लस सिटी” का दर्जा मिल चुका है। शहर में हर दिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें 500 टन गीला और 350 टन सूखा कचरा शामिल है।

इसे 100 प्रतिशत कलेक्ट करने के लिए नगर निगम ने 467 डोर-टू-डोर कचरा वाहन, 629 सीएनजी गाड़ियां और 162 रोड स्वीपिंग मशीनें मैदान में उतार रखी हैं।

रीसाइक्लिंग के बड़े मॉडल भी सक्रिय

भोपाल में अलग-अलग तरह के कचरे के पुनर्चक्रण के लिए कई प्लांट संचालित किए जा रहे हैं -

- प्लास्टिक वेस्ट से उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं।

- थर्माकोल वेस्ट से आर्टिफिशियल ज्वेलरी और सजावटी सामान बनाया जा रहा है।

- नारियल कचरे से कोकोपिट तैयार किया जा रहा है।

- निर्माण मलबे से पेविंग ब्लॉक और ईंटें बनाई जा रही हैं।

- गन्ने के छिलकों से रोजाना करीब 750 किलो सीएनजी तैयार की जा रही है।

स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम प्रतिबद्ध है। शहरवासी भी स्वच्छता में अपना योगदान दें और कचरा गाड़ियों को ही कचरा दें। नागरिक फीडबैक में भी अधिक से अधिक संख्या में वोट करें।- संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम, भोपाल।



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