अस्वीकृत संपत्तियों में गलत एंट्री के साथ ऐसी संपत्तियां भी हैं जो पुरातात्विक महत्व की हैं। इन्हें अपलोड नहीं किया जाना था। इसके लिए बोर्ड ने एएसआइ (ASI) से ऐसी संपत्तियों की जानकारी भी मांगी थी जो अभी तक नहीं मिली है। पोर्टल पर वक्फ एस्टेट और संपत्तियां दोनों एक साथ दर्ज की जा रही हैं, जबकि एक एस्टेट में कई संपत्तियां हो सकती हैं। जैसे एक मस्जिद के अंतर्गत संचालित दुकानें। इसके अलावा भी अस्वीकृत किए जाने के कई कारण हैं। एक तो दोहरी एंट्री किया जाना, रिकॉर्ड साफ-सुथरा नहीं होना, खसरा नंबर मैच नहीं होना आदि। वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि रद्द की गई जिन संपत्तियों में सुधार की गुंजाइश है उन्हें ठीक किया जाएगा।
एंट्री से लेकर स्वीकृत करने तक के तीन स्तर हैं। जिलों से वक्फ बोर्ड के कर्मचारी (मेकर) एंट्री करते हैं। इसके बाद राज्य वक्फ बोर्ड मुख्यालय के नामित अधिकारी (चेकर) परीक्षण करते हैं। तीसरे स्तर पर स्वीकृत करने वाला अधिकारी होता है। अभी मेकर और चेकर के स्तर पर 7,787 संपत्तियां लंबित हैं। ऐसे में अस्वीकृत संपत्तियों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
देश भर की चार लाख 83 हजार संपत्तियों का डिजिटल दस्तावेज स्वीकृत हो चुका है, जबकि 84,318 का अस्वीकृत किया गया है।