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भारत ने चीन के लिए खोले दरवाजे तो नेपाल क्यों नहीं? बालेन सरकार को मिला दबाव बनाने का बड़ा मौका

Updated on 17-07-2026 01:03 PM
काठमांडू: नेपाल में ये मांग तेजी से उठ रही है कि अगर भारत चीनी कंपनियों के लिए अपने दरवाजे खोल सकता है तो काठमांडू फिर बीजिंग से समझौता क्यों ना करे। बालेन सरकार को सलाह दी जा रही है कि दिल्ली की चिंताओं को छोड़कर पावर प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों को शामिल करना चाहिए। दरअसल नेपाल में ये मांग भारत के उस फैसले के बाद उठी है जिसमें चीन से जुड़ी चार कंपनियों को रणनीतिक बिजली ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स की बोली में शामिल होने की इजाजत दी गई है।
ये मांगें उन पुरानी रुकावटों को दूर करने के लिए कूटनीतिक कोशिशों से जुड़ी हैं जो चीन की भागीदारी वाले पनबिजली प्रोजेक्ट्स पर असर डाल रही हैं और सीमा-पार बिजली व्यापार को बढ़ाने में बाधा बन रही हैं। जून में भारत के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग ने चीन के मालिकाना हक या कारोबारी संबंध वाली चार कंपनियों को दो साल की छूट दी है।

इससे उन्हें अहम बिजली ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मुकाबला करने की इजाजत मिल गई। ये कंपनियां हैं TBEA एनर्जी इंडिया, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया)।

नेपाल को चीनी कंपनियों से करार करने का मिला मौका?

भारत सरकार के इस कदम से नेपाल को अपने उन जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के लिए भारत को मनाने का एक बड़ा मौका मिल गया है जिनमें चीन की भागीदारी है। हालाकि ये कंपनियां भारत में ही अपने सारे कंपोनेट्स बनाती हैं लेकिन मोदी सरकार ने जब गलवान घटना के बाद चीनी कंपनियों पर पाबंदी लगाई थी तो इन कंपनियों पर भी असर पड़ा था। सराकर ने उस वक्त भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को बिना पूर्व मंजूरी के कई सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में शामिल होने से रोक दिया गया था।

जिन कंपनियों के लिए खुले दरवाजे उनका चीन से कैसा संबंध?

TBEA एनर्जी इंडिया चीन के TBEA ग्रुप की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी है जबकि नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया का मालिकाना हक पूरी तरह से चीनी इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माता नानजिंग इलेक्ट्रिक के पास है। न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया की चीनी बिजली कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पार्टनरशिप है और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) चीन स्थित ताइकाई ग्रुप से जुड़ी है।

हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि ये छूट सिर्फ इन्हीं चार कंपनियों के लिए है और वो भी सीमित समय के लिए है। दूसरी कंपनियां इस छूट को अपने लिए मिसाल नहीं माने। लेकिन नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इस घटनाक्रम से काठमांडू को उन पाबंदियों को हटाने की मांग करने का मौका मिला है जो क्षेत्रीय संबंध बेहतर होने के बावजूद नेपाल के पनबिजली उद्योग पर असर डाल रही हैं।

नेपाल के लिए भारत पर दबाव बनाने का मौका क्यों?

नेपाल में कई प्रमुख पनबिजली परियोजनाओं जैसे अपर तामाकोशी प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों की अहम हिस्सेदारी या निवेश है। लेकिन भारत की 'सुरक्षा संबंधी चिंताओं' के कारण भारत अक्सर चीनी निवेश वाले प्रोजेक्ट्स से बनी बिजली खरीदने या उन पर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में झिझक दिखाता है।

नेपाल को अलग-अलग पनबिजली योजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को भारतीय बाज़ार में निर्यात करने से पहले भारत से प्रोजेक्ट-विशिष्ट मंजूरी लेनी पड़ती है। डेवलपर्स को पनबिजली निर्माण में सुरंग बनाने और अन्य सिविल कार्यों के लिए जरूरी विस्फोटक आयात करने के लिए काठमांडू में भारतीय दूतावास से जारी 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) पर भी निर्भर रहना पड़ता है।
नेपाल के पावर डेवलपर्स का कहना है कि भारत उन प्रोजेक्ट्स से बिजली निर्यात को मंजूरी देने में हिचकिचाता रहा है जिनमें चीनी निवेशक, चीनी कॉन्ट्रैक्टर या कुछ मामलों में चीनी उपकरण शामिल हैं। इन्हीं चिंताओं का असर विस्फोटक आयात करने के परमिट के नवीनीकरण पर भी पड़ा है।

क्या नेपाल को मिल गया है कूटनीतिक मौका?

  • भारत के इस नए रुख के बाद नेपाल को यह कूटनीतिक मौका मिला है कि वह भारतीय अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखे।
  • चीनी भागीदारी वाली उसकी पनबिजली परियोजनाओं और ऊर्जा व्यापार में आ रही बाधाओं को दूर किया जाए।
  • भारत नेपाल के बिजली ग्रिड के साथ इन प्रोजेक्ट्स को भी अपनी सीमा पार ऊर्जा व्यापार नीति में मंजूरी दे।

रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले को लेकर भारत और नेपाल के ऊर्जा सचिवों के बीच हाल ही में पोखरा में 'संयुक्त संचालन समिति' की बैठकें भी हुई हैं जहां ऊर्जा सहयोग, ट्रांसमिशन लाइनों जैसे 400 kV गोरखपुर-न्यू बुटवल लाइन और बिजली ग्रिड के कॉर्डिनेशन पर विस्तृत चर्चा हुई। नेपाल इसी मंच का इस्तेमाल कर चीनी-लिंक्ड प्रोजेक्ट्स के लिए भारत की हरी झंडी पाने की कोशिश कर रहा है।

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