तूफानी तेजी से दौड़ेगा भारत! संयुक्त राष्ट्र ने बदला विकास दर का अनुमान, कह दी ये बड़ी बात
Updated on
17-05-2024 02:39 PM
नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। अब संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर के अनुमानों को संशोधित किया है, जिसके मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2024 में करीब 7 फीसदी की दर से बढ़ेगी। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मजबूत सार्वजनिक निवेश और लचीले निजी उपभोग के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी बनी रहेगी। संयुक्त राष्ट्र ने '2024 के मध्य तक विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाओं' पर रिपोर्ट जारी की है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 'भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पूर्वानुमान है कि यह साल 2024 में 6.9 फीसदी की विकास दर से बढ़ेगी और 2025 में यह विकास दर 6.6 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी मांग में कमी से व्यापारिक निर्यात वृद्धि पर असर पड़ता रहेगा, लेकिन फार्मास्यूटिकल्स और रसायन निर्यात में जोरदार वृद्धि होने की उम्मीद है।' संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मजबूत घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में भी मजबूत विकास का भारत को फायदा मिला है।
भारत में पहले विकास दर का इतना था अनुमान
पहले संयुक्त राष्ट्र ने इस साल जनवरी महीने में भारत के लिए 6.2 प्रतिशत जीडीपी का पूर्वानुमान लगाया था। अब इसे संशोधित किया गया है। जनवरी में लॉन्च की गई संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना (WESP) 2024 रिपोर्ट में कहा गया था कि मजबूत घरेलू मांग और विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि के बीच 2024 में भारत में विकास दर 6.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। आर्थिक स्थिति के नवीनतम आंकलन में 2025 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का जनवरी में अनुमान 6.6 प्रतिशत पर अपरिवर्तित बना हुआ है।
भारत में महंगाई पर ये है अनुमान
अपडेट में कहा गया है कि भारत में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (consumer price inflation) में कमी आई है। यह साल 2023 में जहां 5.6 फीसदी थी। अब साल 2024 में कम होकर 4.5 फीसदी हो गई है। इसी तरह, अन्य दक्षिण एशियाई देशों में महंगाई दर 2023 में घटी और 2024 में और कम होने की उम्मीद है, जो मालदीव में 2.2 प्रतिशत से लेकर ईरान में 33.6 प्रतिशत तक होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में, मजबूत विकास और उच्च श्रम शक्ति भागीदारी के बीच श्रम बाजार संकेतक भी बेहतर हुए हैं। भारत की सरकार पूंजी निवेश बढ़ाने की कोशिश करते हुए धीरे-धीरे राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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