कश्मीर के सेब किसान चिंतित, लगाया केंद्र पर वादाखिलाफी का आरोप
Updated on
26-12-2025 01:29 PM
श्रीनगर: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। इसी के साथ दोनों देशों की वस्तुओं का शुल्क मुक्त या रियायती शुल्क पर निर्यात होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लेकिन, इस फैसले से कश्मीर के सेब किसानों को बड़ा झटका लगा है। न्यूजीलैंड के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत वहां से आने वाले सेब पर कस्टम ड्यूटी को 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है। किसानों का कहना है कि यह वादाखिलाफी है।
यह वादाखिलाफी है
वहां के सेब कारोबारियों का कहना है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से कुछ वादा किया था। यह वादा था कि विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। लेकिन सरकार ने ठीक उल्टा कर दिया है। कश्मीर के सेब किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनके सेब की बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा, खासकर जो सेब अभी कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोर्स में रखे हैं।
फैसला चिंताजनक
न्यू कश्मीर फ्रूट एसोसिएशन, फ्रूट मंडी, श्रीनगर के प्रेसिडेंट बशीर अहमद बशीर ने कहा, "यह फैसला चिंताजनक है और इससे हमारे फलों की बिक्री पर असर पड़ेगा जो अभी CA स्टोर्स में हैं। यह फैसला सेब किसानों के हित में नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "सरकार ने हमसे वादा किया था कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने हमसे वादा किया था कि विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा, लेकिन उन्होंने ठीक उल्टा किया है। हम जल्द ही सरकारी प्रतिनिधियों से मिलेंगे और अपनी चिंताएं बताएंगे ताकि इस फैसले को वापस लिया जा सके।"
क्या हुआ है फाइनल
इस FTA के तहत, जो सोमवार को फाइनल हुआ, भारत पहले साल में 32,500 टन न्यूजीलैंड के सेब को 25% कस्टम ड्यूटी पर आयात करने की अनुमति देगा। यह मात्रा धीरे-धीरे छठे साल तक 45,000 टन तक बढ़ जाएगी। सीपीएम विधायक मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने कहा, "भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत सेब आयात पर कस्टम ड्यूटी को 50% से घटाकर 25% करना सेब किसानों के लिए सीधा झटका है। सेब के घरेलू उत्पादन का 22.5% आयात पहले से ही हो रहा है। अब ड्यूटी घटने से सस्ते विदेशी सेब जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों को और भी मुश्किल में डाल देंगे।"
भारत का अधिकतर सेब कश्मीर से
आपको बता दें कि भारत में जितना भी सेब उत्पादन होता है, उसका लगभग तीन-चौथाई हिस्सा जम्मू-कश्मीर से आता है। जम्मू-कश्मीर में बागवानी उद्योग का कारोबार करीब 10,000 करोड़ रुपये का है और यह राज्य की जीडीपी में लगभग 9% का योगदान देता है। कश्मीर हर साल 20 लाख टन से ज्यादा सेब पैदा करता है, और कुछ सालों में यह उत्पादन 25 लाख टन तक पहुंच जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कश्मीर की लगभग आधी आबादी, यानी करीब 35 लाख लोग, सीधे या परोक्ष रूप से सेब उद्योग से जुड़े हुए हैं।
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