समस्या से कैसे निपट रही है सरकार?
- अधिकारी कई मोर्चों पर काम कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- एलएनजी के स्रोतों में विविधता लाना (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका)
- और ज्यादा स्पॉट कार्गो खरीदना
- घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना
- घरों और जरूरी क्षेत्रों को सप्लाई में प्राथमिकता देना
पेट्रोनेट एलएनजी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां शिपमेंट को फिर से शेड्यूल कर रही हैं। कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। यह सिर्फ एक छोटी अवधि की समस्या नहीं है। भारत खाना पकाने, परिवहन, उर्वरक उत्पादन और उद्योग के लिए आयातित गैस पर तेजी से निर्भर होता जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने पहले ही तेल क्षेत्र में कमजोरियों को उजागर कर दिया था। अब मिडिल ईस्ट संकट गैस के मामले में भी यही कर रहा है। अभी के लिए स्थिति नियंत्रण में है। घरों को अभी भी सुरक्षित रखा जा रहा है। लेकिन, रास लाफान और होर्मुज में रुकावटें हफ्तों या महीनों तक जारी रहती हैं तो दबाव और बढ़ सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर देश भर के और भी ज्यादा रसोईघरों तक इसका असर दिखेगा। ऐसे में आने वाले हफ्ते बहुत अहम होंगे।


