'पाकिस्तान का पिछलग्गू बनने की जरूरत नहीं', भारतीय राजदूत की दो टूक, कहा- चीन की तरह नीति
Updated on
04-07-2026 03:22 PM
बीजिंग: चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कहा है कि ईरान संकट पर पहले से ही कई देशों की मौजूदगी वाले मामले में मध्यस्थता करने से भारत को कोई खास फायदा नहीं होता। विक्रम दोरईस्वामी 4 जुलाई को 14वें वर्ल्ड पीस फोरम में 'संरक्षणवाद और वैश्विक आर्थिक शासन' पैनल में बोलते हुए ये बातें कही हैं।
ग्लोबल फोरम पर भारत की भूमिका और ईरान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों की तुलना को भारतीय राजदूत ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस कार्यक्रम को बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम ने आयोजित किया था। इसमें ईरान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता और वैश्विक संकट में भारत की भूमिका को लेकर उनसे सवाल किया गया था।
'ईरान संकट में पाकिस्तान की तरह मध्यस्थता करने की जरूरत नहीं'
राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कार्यक्रम में कहा 'आप जिस मध्यस्थता की बात कर रहे हैं उसके बारे में यह तय करना अलग-अलग देशों का काम है कि क्या इससे उनकी बड़ी राष्ट्रीय स्थिति में कोई मूल्य जुड़ता है। हमने अतीत में ऐसा किया है। मुझे नहीं लगता कि इस समय जब पहले से ही कई देश इसमें शामिल हैं इससे हमें किसी खास तरह का फायदा होगा।'
भारतीय राजदूत ने आगे कहा कि दो बड़ी ताकतों के तौर पर भारत और चीन दोनों ने ही यूक्रेन या ईरान में मध्यस्थता के लिए अपनी सेवाएं नहीं दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान से करना गलत है खासकर उनकी अलग-अलग आर्थिक स्थिति या दुनिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव को देखते हुए।
उन्होंने कहा 'जहां तक मैं देख पा रहा हूं हाल के संकटों में चाहे वह पश्चिमी एशिया हो या पूर्वी यूरोप हमारी स्थिति काफी हद तक चीन जैसी ही रही है। मुझे नहीं लगता कि चीन या भारत इनमें से किसी भी मामले में मध्यस्थता करने के लिए आगे आ रहे हैं। और सच कहूं तो अगर मैं थोड़ा साफ-साफ कहूं तो पाकिस्तान के साथ तुलना करना हमारे लिए थोड़ा अनुचित है। मुझे लगता है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं ही बहुत कुछ बता देंगी। यह उस देश पर निर्भर करता है कि वह इस क्षेत्र में क्या करना चाहता है। मुझे नहीं लगता कि हमें उनके तौर-तरीकों का अनुसरण करना चाहिए।'
'बहुत कम देश कर पाते हैं भारत की बराबरी'
विक्रम दोरईस्वामी ने कार्यक्रम में आगे कहा 'वैश्विक नेतृत्व के मामले में भारत और क्या कर सकता है इस पर बात करते हुए हमें देशों को इस आधार पर देखना चाहिए कि वे असल में बड़े वैश्विक सिस्टम में क्या कर रहे हैं। दुनिया के साथ हमारा जुड़ाव ऐसे स्तर पर है जिसकी बराबरी बहुत कम देश कर पाते हैं। इसमें यूरोपीय देशों और आसियान (ASEAN) देशों के साथ हमारा आर्थिक जुड़ाव और शांति और सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों में योगदान देने की हमारी इच्छा शामिल है। हम यह सब करने के लिए तैयार हैं।'
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