MP में ग्रामीण पर्यटन को लगेंगे पंख: 1,000 नए गांवों में विस्तार पाएगी 'होम-स्टे योजना'; ट्राइबल फंड से मिलेगी सब्सिडी, सर्वे शुरू
Updated on
25-05-2026 05:50 PM
भोपाल। घरेलू और विदेशी पर्यटकों को गांव के पारंपरिक रहन-सहन, स्थानीय खान-पान और संस्कृति का अनुभव कराने तथा इसके माध्यम से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई होम स्टे की योजना मप्र में काफी लोकप्रिय हो रही है।अब मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'होम-स्टे योजना' का विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए धरती आबा परियोजना शुरू की जा रही है। इसके तहत राज्य के एक हजार नए गांवों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए पर्यटन बोर्ड द्वारा सर्वे शुरू कर दिया गया है।
'धरती आबा परियोजना' में जुड़ेंगे गांव
दरअसल, प्रदेश में पर्यटन बोर्ड ने धरती आबा परियोजना के अंतर्गत 14 जनजातीय गांवों के नाम तय कर लिए गए हैं। इनमें अनूपपुर जिले के आठ, डिंडौरी के चार, मंडला के दो गांव शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में होम-स्टे निर्माण के लिए ट्राइबल फंड से सब्सिडी भी दी जाएगी। इसके लिए प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिल गई है। इसके अंतर्गत ऑपरेशनल होम स्टे 360 हैं। धरती आबा प्रोजेक्ट के तहत 86 बनाए जाएंगे।
होम स्टे बनाने के लिए सरकार द्वारा 40 फीसदी अनुदान (नया निर्माण करने पर अधिकतम दो रुपये लाख तक) दिया जाता है।इसके लिए किसी होटल के लाइसेंस या कमर्शियल बिजली कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। होम-स्टे से होने वाली 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी मुक्त होती है।
अब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 67.6 करोड़ रुपये का योगदान
मप्र पर्यटन बोर्ड के डायरेक्टर स्किल डीपी सिंह के अनुसार वर्तमान में मप्र में 77 गांवों में 447 रजिस्टर्ड होम-स्टे हैं, जिनमें से 360 पूरी तरह संचालित मोड में हैं। इस पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। इसके चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत होते देखा जा रहा है।
अब तक इन होम-स्टे के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे तौर पर 67.6 करोड़ रुपये की आय हुई है।
होम-स्टे वाले 65 गांवों में सोलर और एलईडी लाइटें लगाई गईं हैं। इससे रात का समय भी पर्यटकों के लिए गांवों में सुरक्षित और सुलभ हो गया है। अगले एक साल सभी होम-स्टे वाले गांवों में सोलर लाइट लगाए जाने की योजना है।
सैलानियों को भा रहा कोदो-कुटकी और चूल्हे का स्वाद
प्रदेश में संचालित होम-स्टे में पहुंचने वाले पर्यटकों को शुद्ध ग्रामीण परिवेश का अनुभव मिल रहा है। विदेशी और शहरी सैलानी यहां विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर बनी रोटियां और मध्य प्रदेश के पारंपरिक मोटे अनाज जैसे 'कोदो-कुटकी' से बने व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं।
स्थानीय कला, शिल्प और परंपराओं को करीब से देखने का यह अनुभव इस योजना की सफलता का मुख्य आधार बना हुआ है।
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