भारत के लिए मतलब
रूसी तेल की कीमतों में तेजी का मतलब है:- भारत के पास उपलब्ध सस्ते ईंधन का विकल्प अब खत्म होता जा रहा है।
- इससे देश के आयात बिल में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
- यह स्थिति भारत के राजकोषीय घाटे को सीधे तौर पर बढ़ाएगी।
- घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल ला सकती है।
- पहले से ही पश्चिम एशिया संकट के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में रूस भारत को 20-30 डॉलर प्रति बैरल की छूट दे रहा था। अब छूट लगातार गुम होती जा रही है। कीमतों में तेजी का मतलब है कि रूस से तेल खरीदना अब सऊदी अरब या इराक से तेल खरीदने जितना ही महंगा पड़ता जा रहा है। इससे भारत की 'सस्ती ऊर्जा' वाली रणनीति कमजोर हो रही है।


