सऊदी अरब की अहमियत
हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमत में काफी तेजी आई है। इस हफ्ते यह 108 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। साथ ही भारत को रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट खत्म हो गई है। सप्लाई में रुकावट के दौरान स्पॉट मार्केट की कीमतें फ्यूचर्स की कीमतों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं। टैंकर का किराया पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब है।रिफाइनरी इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों को चिंता है कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहा टकराव और बढ़ सकता है। इससे वहां एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बढ़ सकता है। सऊदी अरब लंबे समय से दुनिया के बड़े तेल सप्लायर्स में से एक रहा है। ग्लोबल प्रोडक्शन में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है और वह बाजार की स्थितियों के हिसाब से उत्पादन में बदलाव कर सकता है।


