दो कंपनियों की लापरवाही और खतरे में आ गया 50 हजार करोड़ का मसाला बाजार
Updated on
13-05-2024 12:28 PM
नई दिल्ली: विदेशों में भारत के दो प्रमुख मसाला ब्रांड्स के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई ने इस इंडस्ट्री की तरफ सबका ध्यान आकर्षित किया है। यह ऐसी इंडस्ट्री है जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत ग्रोथ दिख रही है। इसके साथ ही खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और कंपनियों के वैश्विक मानकों का पालन करने का मुद्दा भी उभरा है। साथ ही किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ब्रांडेड मसाला इंडस्ट्री के 2025 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आखिर इस इंडस्ट्री के लिए क्या दांव पर लगा है? आइए विस्तार से जानते हैं...
विवाद क्या है?
हॉन्ग कॉन्ग और सिंगापुर ने दो लोकप्रिय भारतीय ब्रांड्स एमडीएच और एवरेस्ट के मसालों की बिक्री बंद कर दी है। इन देशों के अधिकारियों का दावा है कि इन भारतीय कंपनियों के कुछ मसालों में मान्य सीमा से ज्यादा एथिलीन ऑक्साइड पाया गया है। इन दोनों ब्रांडों के कुछ खास मसाले ऑस्ट्रेलिया की खाद्य सुरक्षा एजेंसी की जांच के दायरे में भी आ गए हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका का एफडीए भी इन दोनों ब्रांड्स के उत्पादों की जांच कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथिलीन ऑक्साइड से कैंसर होने का खतरा रहता है। यह डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है और सेलुलर फंक्शन को बाधित कर सकता है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से कैंसर का खतरा रहता है।
कंपनियां क्या कहती हैं?
एवरेस्ट और एमडीएच दोनों का कहना है कि वे सख्त हाइजीन और सेफ्टी मानकों का पालन करते हैं। एवरेस्ट ने कहा है कि उसके उत्पादों को हॉन्ग कॉन्ग और सिंगापुर में प्रतिबंधित नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि एवरेस्ट के 60 उत्पादों में से केवल एक को ही जांच के लिए रखा गया है। हम अपने ग्राहकों को आश्वस्त करते हैं कि हमारे उत्पाद सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले हैं, इसलिए चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है। एमडीएच (महाशियां दी हट्टी) ने कहा है कि कंपनी को सिंगापुर या हॉन्ग कॉन्ग की रेगुलेटरी अथॉरिटीज की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली है और ऐसे दावे झूठे हैं। इनका कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 100 साल से ज़्यादा पुराना इस ब्रांड भारत में एक जाना-माना नाम है। कंपनी ने कहा कि वह अपने मसालों के भंडारण, प्रसंस्करण या पैकेजिंग के किसी भी चरण में एथिलीन ऑक्साइड का इस्तेमाल नहीं करती है।
सरकार क्या रही है?
खाद्य सुरक्षा नियामक - भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी मसालों कंपनियों की जांच की घोषणा की है। भारतीय मसाला बोर्ड ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। घरेलू स्तर पर बेचे जाने वाले और निर्यात के लिए खाद्य उत्पादों पर सख्त जांच अनिवार्य कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मसालों की क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए देश में व्यापक खाद्य सुरक्षा मानक हैं। FSSAI ने उन रिपोर्टों को भी भ्रामक और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। इनमें दावा किया गया था कि भारतीय जड़ी-बूटियों और मसालों में कीटनाशकों का उच्च स्तर होता है। अधिकारियों ने देश के कई हिस्सों में असंगठित क्षेत्र पर भी कड़ी जांच शुरू की है।
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