भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ग्रामीण महिला पर हमले के बाद मारे गए बाघ की मौत अब रहस्य बनती जा रही है। शुरुआती जांच में जहां बाघ को ट्रैंक्यूलाइज करने के दौरान दी गई बेहोशी की दवा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन की स्थिति में दवा का अधिक डोज बाघ की मौत का कारण बन सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी निगरानी बढ़ा दी है और बाघ के शव का दोबारा परीक्षण कराया गया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनटीसीए के निर्देश पर जबलपुर में बाघ के शव का पुन: परीक्षण कराया गया। इस दौरान एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर, मुकुंदपुर और डब्ल्यूसीटी के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने शव के करीब 15 अंगों के नमूने एकत्र किए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बढ़ते जल संकट के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। बांधवगढ़ और कान्हा जैसे टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। आरोप है कि वन विभाग कृत्रिम जल स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। यही वजह है कि बाघ पानी की तलाश में गांवों तक पहुंच रहे हैं और मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।