यूरोपीय देश फायदे में
इसकी वजह यह है कि कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है और रूस प्रीमियम पर तेल बेच रहा है। ईरान युद्ध से पहले रूसी तेल डिस्काउंट पर मिल रहा था। एशियाई देशों की तुलना में बाकी देश मिडिल ईस्ट से कम तेल खरीदते हैं। मसलन तुर्की, साउथ अफ्रीका, ट्यूनीशिया तथा सेंट्रल और ईस्टर्न यूरोप के देश मिडिल ईस्ट से 20 फीसदी से भी कम तेल खरीदते हैं।ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी जो 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। हालांकि हाल में इसमें कई उतारचढ़ाव आए हैं लेकिन यह लगातार 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अभी ब्रेंट क्रूड करीब तीन डॉलर की गिरावट के साथ 101.5 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।


