Select Date:

'अभियोजन की कहानी को आंख मूंदकर सच नहीं मान सकते', POCSO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Updated on 19-09-2026 10:52 AM
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी के खिलाफ दोष की वैधानिक धारणा का मतलब यह नहीं है कि अभियोजन पक्ष की कहानी को हर हाल में सही मान लिया जाए। अदालतों को रिकॉर्ड पर मौजूद पूरे सबूत का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण करना होगा।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने दिल्ली की ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। दोनों अदालतों ने आरोपी को दोषी ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों में मौजूद विरोधाभासों और कमियों को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया। फैसला 17 सितंबर को सुनाया गया।

क्या है मामला?

मामला 2015 में दक्षिण दिल्ली के कालकाजी इलाके की एक झुग्गी बस्ती का था। एक महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न किया। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन की कहानी में महत्वपूर्ण विरोधाभास और कमियां थीं। अदालत के सामने पानी को लेकर दोनों पक्षों के बीच पुराने विवाद का पहलू भी आया था।

निचली अदालतों ने किन बातों को नजरअंदाज किया?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट POCSO एक्ट में मौजूद दोष की वैधानिक धारणा से प्रभावित दिखाई दिए। इसके कारण मां के बयान में मौजूद महत्वपूर्ण विरोधाभासों और कमियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जबकि जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने इन पहलुओं को सामने रखा था। पीठ ने यह भी पाया कि मेडिकल और अन्य साक्ष्य अभियोजन की कहानी को पर्याप्त समर्थन नहीं दे रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पूरे रिकॉर्ड को देखने पर अभियोजन आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

' Presumption Of Guilt ' का मतलब क्या?

फैसला लिखते हुए जस्टिस एन.वी. अंजारिया ने स्पष्ट किया कि POCSO में दोष की वैधानिक धारणा का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी के पक्ष में मौजूद साक्ष्यों को नजरअंदाज कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि कानूनी धारणाओं का यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में अभियोजन पक्ष की कहानी को 'अटल सत्य' मान लिया जाए। अदालतों की जिम्मेदारी है कि वे किसी मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विश्लेषण करें।

कोर्ट ने 'रिवर्स बर्डन' पर भी किया स्पष्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर अपनी बेगुनाही साबित करने का उल्टा बोझ यानी 'रिवर्स बर्डन' होने का मतलब यह नहीं है कि आपराधिक मामलों में लागू सामान्य सबूत के मानक बदल जाते हैं। अदालत ने जोर दिया कि अभियोजन पक्ष को अपना मामला स्थापित करना होता है और आरोपी को अपने बचाव के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। POCSO की धाराएं 29 और 30 वैधानिक धारणाएं बनाती हैं, लेकिन ये धारणाएं खंडनीय हैं और अदालत को पूरे साक्ष्य की जांच करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करतीं।

सिर्फ धारणा के आधार पर दोष साबित नहीं होगा

पीठ ने कहा कि अदालतें दोष की वैधानिक धारणा के आधार पर अभियोजन पक्ष के दावों को यांत्रिक तरीके से स्वीकार नहीं कर सकतीं। यदि अभियोजन की कहानी में गंभीर विरोधाभास, असंभावनाएं या अन्य कमियां सामने आती हैं, तो अदालत को उन पर विचार करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ वैधानिक धारणा लागू होने के बावजूद उसे अपने बचाव में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर उस धारणा को खंडित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

आठ अन्य कानूनों का भी किया गया जिक्र

सुप्रीम कोर्ट के 42 पन्नों के फैसले में ऐसे वैधानिक प्रावधानों वाले आठ अन्य कानूनों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम, फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) और परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत को दोष की वैधानिक धारणा के आधार पर अभियोजन की कहानी को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करना चाहिए। अदालत को मामले में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का सामान्य कानूनी सिद्धांतों के अनुसार मूल्यांकन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः दिल्ली हाई कोर्ट के 3 जुलाई 2025 के फैसले और ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में आवश्यक नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 19 September 2026
भास्कर रिपोर्टर प्रमोद साहू ने साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के साथ बातचीत की। इस दौरान एक्सपर्ट ने कहा कि बच्चों के हाथ में फोन और उसमें ऑनलाइन गेम अब…
 19 September 2026
मुंबई के पवई स्थित IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे नाम के स्टूडेंट की शुक्रवार शाम मौत हो गई। मुंबई पुलिस के मुताबिक, साहिल ने हॉस्टल के कमरे में फंदे से…
 19 September 2026
नई दिल्ली: रिश्वत की शिकायत मिली, CBI ने तुरंत FIR दर्ज की और कुछ ही घंटों में जाल बिछा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस तेजी पर सवाल उठाते हुए…
 19 September 2026
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी के खिलाफ दोष की वैधानिक धारणा का मतलब यह नहीं है…
 19 September 2026
नई दिल्ली: दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर…
 19 September 2026
अनिल बलूनी: नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS सम्मेलन के पहले ही दिन जब ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ की घोषणा हुई, तो वह केवल एक औपचारिक कूटनीतिक वक्तव्य नहीं था,…
 18 September 2026
बैंगलुरू: इंडियन एयरफोर्स को आज (शुक्रवार) दो LCA मार्क-1 ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तीन बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट HTT40 की डिलीवरी हो जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में ये कार्यक्रम…
 18 September 2026
नई दिल्ली: पूर्व IPS अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सत्य निकेतन में PG इमारत ढहने से 7 लोगों की…
 18 September 2026
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व ADC मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपना पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया है, जिसके जरिए वे मोटी कमाई…
Advt.