ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने अपने देश के गुलामी के इतिहास पर दुख जताया है।
उन्होंने कहा कि गुलामों के व्यापार में ब्रिटेन की रोल इतिहास का शर्मनाक हिस्सा है। इसे याद कर उनका दिल दहलता है और उन्हें गहरा दुख होता है।

चार्ल्स ने मंगलवार को एंटीगुआ और बारबुडा में कॉमनवेल्थ देशों के नेताओं की बैठक की शुरुआत करते हुए यह बात कही।

उनका बयान ऐसे समय आया है, जब कैरिबियाई देश ब्रिटेन से गुलामी के लिए माफी और मुआवजा मांग रहे हैं।


चार्ल्स बोले- इतिहास को बदल नहीं सकते, उससे सीख सकते हैं

किंग चार्ल्स ने कहा कि गुलामी का इतिहास आज भी कैरिबियाई देशों और कॉमनवेल्थ के दूसरे सदस्यों को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इतिहास में हमारे पूर्वजों के अच्छे काम भी हैं और गलतियां भी। हम उनके किए कामों को बदल नहीं सकते, लेकिन उनसे सीख जरूर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ हिम्मत और मजबूत इरादों से लड़ाई लड़ी जा सकती है। चार्ल्स ने गुलामों के व्यापार को खत्म करने में ब्रिटिश रॉयल नेवी की भूमिका का भी जिक्र किया।

कैरिबियाई देश ब्रिटेन से माफी और मुआवजा मांग रहे

कैरिबियाई देशों का कहना है कि गुलामी के दौरान उनके लोगों और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ था। इसलिए ब्रिटेन को अपनी भूमिका के लिए माफी मांगनी चाहिए और मुआवजा देना चाहिए।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भी कहा है कि सरकार कॉमनवेल्थ देशों से औपचारिक माफी मांगने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। हालांकि, बकिंघम पैलेस ने साफ किया है कि मुआवजा देने का फैसला राजा नहीं कर सकते। यह ब्रिटिश सरकार का मामला है।

1500 से 1800 के बीच ब्रिटेन ने अफ्रीका से लोगों को गुलाम बनाकर अपने उपनिवेशों में भेजा। ब्रिटिश संसद ने भी इस कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कई कानून बनाए।


ब्रिटेन ने 32 लाख अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाया

  • ट्रांसअटलांटिक स्लेव ट्रेड डेटाबेस के मुताबिक, ब्रिटेन ने करीब 32 लाख अफ्रीकी लोगों को अटलांटिक महासागर पार ले जाकर गुलाम बनाया था।

  • यूरोपीय देशों ने मिलकर 1.25 करोड़ से ज्यादा अफ्रीकी लोगों को पकड़कर गुलामी के लिए बेचा था।

  • ब्रिटेन ने 1807 में गुलामों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई। 1833 में गुलामी खत्म करने का कानून बनाया गया, जो 1834 से लागू हुआ।

  • गुलामों को पूरी आजादी मिलने में 1838 तक का समय लगा। गुलामी खत्म होने के बाद ब्रिटेन ने पीड़ितों को नहीं, बल्कि उनके मालिकों को मुआवजा दिया।

  • सरकार ने गुलामों के मालिकों को 2 करोड़ पाउंड (करीब 255 करोड़ रुपए) दिए। यह उस समय ब्रिटेन के सालाना बजट का करीब 40% था। इस रकम के लिए ब्रिटिश सरकार ने जो कर्ज लिया था, उसे चुकाने में 2015 तक का समय लगा।

मुआवजे की जगह कर्ज में राहत देने की तैयारी

ब्रिटिश सरकार कॉमनवेल्थ देशों के लिए 'डेट रीसेट' योजना लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत उन देशों को कर्ज के बढ़ते ब्याज से राहत देने की बात है।

इसे गुलामी के लिए माफी और मुआवजे की मांग के बीच ब्रिटेन के एक वैकल्पिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

कॉमनवेल्थ देशों की यह बैठक हर दो साल में होती है। इसमें संगठन के 56 सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल होते हैं।