प्रतापगढ़ में मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्र का शव मिला है। शव हॉस्टल के नीचे पार्क में पड़ा था। रविवार सुबह 8 बजे छात्रों ने शव देखा तो चीख-पुकार मच गई। छात्र 2024 बैच का मिथिलेश कुमार (27) था। वह बलिया का रहने वाला था।
वह हॉस्टल में पहली मंजिल के कमरा नंबर- 211 में रहता था। हॉस्टल की 7वीं फ्लोर यानी छत पर उसके दो मोबाइल और चश्मा मिला है। एएसपी आलोक कुमार ने घटनास्थल के बाद छात्र के कमरे की जांच की। वहां से मोबाइल-लैपटॉप जब्त कर लिया है।
कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। दोस्तों के मुताबिक, मिथिलेश शनिवार शाम अकेले चाय पीने कॉलेज से बाहर गया था। इसके बाद हॉस्टल की मैस में खाना खाया।
मौत कैसे हुई? हत्या, सुसाइड या हादसा? यह अभी क्लीयर नहीं है। पुलिस अफसरों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही वजह स्पष्ट होगी।
हॉस्टल के कमरे में दो छात्र साथ में रहते थे
मिथिलेश एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में फेल हो गया था। उसने दोबारा एग्जाम दिया था। वह सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज में केशव राय हॉस्टल में पहली मंजिल के कमरा नंबर- 211 में रहता था। कमरे में उसके साथ 2 छात्र अजीत और दीपक सोनकर रहते थे। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।
दोस्तों के मुताबिक, मिथिलेश शनिवार को शाम में अकेले चाय पीने के लिए कॉलेज से बाहर गया था। वह जब लौटा तो वह ठीक था। उसने हॉस्टल की मैस में खाना खाया। इसके बाद हम अपने कमरे में आ गए। काफी देर बात की और फिर सो गए। इसके बाद रात को क्या हुआ-कैसे हुआ। कुछ पता नहीं।
एएसपी आलोक कुमार ने घटनास्थल के बाद छात्र के कमरे की जांच की। वहां से मोबाइल-लैपटॉप जब्त कर लिया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी की जांच कर रही है। सोनेलाल मेडिकल कॉलेज प्रतापगढ़ का सरकारी मेडिकल कॉलेज है।
छत पर मिले दो मोबाइल फोन और चश्मा, फॉरेंसिक टीम ने की जांच
पुलिस को मिथिलेश के दो मोबाइल फोन और चश्मा हॉस्टल की सातवीं मंजिल की छत पर मिला है। मिथिलेश के दोस्तों ने पूछताछ में बताया कि वह तनाव में रहता था। फर्स्ट ईयर में फेल हो गया था। दोबारा दूसरी बार भी उसका एक पेपर अच्छा नहीं हुआ था।
एमबीबीएस छात्र फारूक खान ने बताया कि उसके दोस्त का फोन आया था। उसने बताया कि मिथिलेश नीचे गिरा पड़ा है। इसके बाद वह 8:30 बजे नीचे पहुंचे तो मिथिलेश वहां पड़ा था। उसने ऐसी किसी परेशानी की बात कभी नहीं कही थी।
पिता कोलफील्ड में करते हैं काम
मिथिलेश तीन भाइयों में मंझला था। उसका बड़ा भाई मुकेश प्रयागराज में रहकर सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है, जबकि छोटा भाई उमेश मथुरा में एलटी का कोर्स कर रहा है। मिथिलेश दशहरे पर घर आया था। मिथिलेश के पिता कविलाश राम पश्चिम बंगाल की कोलफील्ड में काम करते हैं।
घटना की सूचना मिलने पर वह भी वहां से निकल चुके हैं। उसकी बहन रानी उर्फ प्रियंका की शादी पिछले साल मई में हुई थी। वह चिलकहर ब्लॉक के डुमरी में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के पद पर तैनात हैं। मां धनवाती देवी गृहिणी हैं और गांव में ही रहती हैं।
पंद्रह दिन पहले ही घर आया था मिथिलेश
मिथिलेश करीब 15 दिन पहले ही घर आया था। उस समय सब कुछ सामान्य था। मां धनवाती देवी ने बताया कि शनिवार रात करीब 8 बजे उनकी मिथिलेश से फोन पर बात हुई थी। उस समय भी सब कुछ ठीक था।
मिथिलेश की मौत की जानकारी अभी मां को नहीं दी गई है। वह बेटे से बात करने की जिद पर अड़ी हैं। उनका कहना है कि जब तक बेटे से बात नहीं होगी, तब तक वह न कुछ खाएंगी और न ही पानी पिएंगी।
छत से कूदा तो शरीर पर चोट के निशान क्यों नहीं?
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मिथिलेश के शव पर कहीं भी चोट के निशान नहीं मिले हैं। अगर यह माना जाए कि उसने 7वीं मंजिल से कूदकर सुसाइड किया है तो फिर शरीर पर चोट के निशान होने चाहिए। शव भी ओंधे मुंह मिला है।
दूसरी बात, अगर उसने कूदकर सुसाइड नहीं किया तो फिर छत पर उसका मोबाइल और चश्मा कैसे पहुंच गए। फिलहाल, पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के साथ ही कड़ी से कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। पुलिस मोबाइल की भी जांच कर रही है। शायद वहां से पुलिस को मौत का कुछ सुराग मिल जाए।
कौशांबी में सोफे पर सो रही तीन महीने की मासूम की आग में जलकर मौत हो गई। बच्ची को बचाने की कोशिश में उसके चाचा भी झुलस गए। परिजन बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला मुख्यालय से 28 किमी दूर चरवा थाना क्षेत्र के बेरुवा गांव का है।