अव्यावहारिक बंटवारा । खुफिया दस्तावेज
में शेख अब्दुल्ला और तत्कालीन अमेरिकी राजदूत लॉय हेंडरसन की बातचीत का भी जिक्र है। अब्दुल्ला ने आजाद कश्मीर देखने की इच्छा जताई और कहा कि कई कश्मीरी भी ऐसा चाहते हैं। उनका मानना था कि स्वतंत्र कश्मीर के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों से अच्छे रिश्ते जरूरी होंगे। अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के धार्मिक शासन को कश्मीर के लिए नुकसानदेह बताया और भारत के साथ जाना बेहतर माना। उन्होंने कश्मीर के बंटवारे को भी अव्यावहारिक बताया।अब्दुल्ला की गिरफ्तारी। तब शेख
अब्दुल्ला के सहयोगी रहे बख्शी गुलाम मोहम्मद भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहे थे। वह दिल्ली के संपर्क में रहते और घाटी की गतिविधियों की जानकारी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को देते थे। 1953 में अब्दुल्ला को पद से हटाकर गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर विदेशी ताकत से मिलीभगत के आरोप लगे।हालांकि, तब नेहरू ने अमेरिकी साजिश की बात खारिज की थी। फरवरी 1954 में बख्शी के नेतृत्व वाली कश्मीर विधानसभा ने भारत में विलय के पक्ष में फैसला किया। नेहरू ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय सामने आ चुकी है, इसलिए जनमत संग्रह जरूरी नहीं है।


