क्या रूस बनेगा ईरान युद्ध में मध्यस्थ?
सीएनएन न्यूज 18 के मुताबिक पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता कमजोर पड़ने के बाद तेहरान अब रूस को एक अहम साझीदार के तौर पर देख रहा है। उम्मीद है कि अराघची, व्लादिमीर पुतिन से मिलकर परमाणु संवर्धन से जुड़ी चिंताओं, यूरेनियम के भंडार के प्रबंधन और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर चर्चा करेंगे। यह कदम मॉस्को से तकनीकी और रणनीतिक समर्थन हासिल करने के ईरान के इरादे का संकेत देता है खासकर परमाणु से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर।इंटेलिजेंस नोट से पता चलता है कि डिप्लोमेसी का अगला फेज शायद मॉस्को में होने वाले डेवलपमेंट और वॉशिंगटन की तरफ से किसी नए सीजफायर की घोषणा पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर देखा जाएगा तो फिलहाल ईरान एक नई तरह का गेम खेलता नजर आ रहा है और सिर्फ पाकिस्तान पर निर्भर रहने के बजाए कई और मध्यस्थों की तलाश कर रहा है।


