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CM यादव का बड़ा फैसला: भूमि अधिग्रहण पर मिलेगा चार गुना मुआवजा, विकास कार्यों के लिए 25 हजार करोड़ मंजूर

Updated on 23-04-2026 10:07 AM
भोपाल। कहते हैं कि कोई भी बड़ा निर्णय यूं ही नहीं हो जाता। ऐसा ही कुछ किसानों को भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा देने के मामले में भी हुआ। अधिकारी इसके लिए बिलकुल भी तैयार नहीं थे। उन्होंने हर संभव प्रयास किया कि कोई बीच का रास्ता निकल आए, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मन बना चुके थे। दरअसल, मंगलवार देर रात कैबिनेट का एजेंडा तय हो गया था, उसमें भूमि अधिग्रहण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल नहीं था।

अधिकारियों के तर्कों पर भारी पड़ा मुख्यमंत्री का निर्णय

बुधवार को सुबह साढ़े नौ बजे मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारियों को बुलाया। प्रस्ताव पर चर्चा हुई। वाणिज्यिक कर की प्रभारी अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और वित्त विभाग के सचिव लोकेश जाटव ने तमाम तर्क रखे और गुणांक एक से बढ़ाकर दो तक करने के लिए दो विकल्प प्रस्तुत किए, मगर मुख्यमंत्री डिगे नहीं। उन्होंने कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए।

कैबिनेट बैठक में मुआवजे पर मंथन

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में जैसे ही 'एक्स एजेंडे' के तौर पर यह प्रस्ताव आया तो मुआवजा बढ़ाने वाली समिति के सदस्यों मंत्री राकेश सिंह, तुलसीराम सिलावट और चैतन्य कुमार काश्यप ने अपनी बात रखी। सबने मुआवजा बढ़ाने का पक्ष लिया। वहीं, मुख्य सचिव ने पूरे मामले को विस्तार से रखा और कहा कि विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इसमें बताया गया कि नगर निगम, नगर पालिका व नगर परिषद की बाहरी सीमा से अनुसूचित और गैर अनुसूचित क्षेत्र की दूरी में गुणांक 1.10 से दो तक प्रस्तावित था।

जब इस पर बात नहीं बनी तो दूसरा शहर, नियोजन क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र में एक से लेकर दो तक गुणांक की बात की गई। इसमें आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र में दो गुणांक देना प्रस्तावित किया गया। मुख्यमंत्री का कहना था कि अलग-अलग दर लगने से गलत संदेश जाएगा। हम कहां-कहां समझाएंगे? ऐसा करना ठीक नहीं रहेगा। हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए और फिर गुणांक दो करने यानी कलेक्टर दर का चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया गया।

विकास कार्यों और जन कल्याण के लिए बड़ी राशि स्वीकृत

बैठक में लोक निर्माण विभाग से जुड़े विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़क निर्माण के लिए 7,212 करोड़ रुपये, ग्रामीण सड़कों और अन्य जिला मार्गों के निर्माण एवं उन्नयन के लिए 6,150 करोड़, पुलों और सड़कों के उन्नयन के लिए 1,087 करोड़, भवनों के मरम्मत और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 765 करोड़ तथा बड़े पुलों के निर्माण की योजनाओं को निरंतर रखने के लिए 9,950 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,191 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसी तरह छठवें राज्य वित्त आयोग के लिए 15 पदों के सृजन और मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तृतीय चरण को तीन वर्ष के संचालन के लिए 23 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली।


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