अभी क्या है राज्यों की स्थिति?
समिति ने कहा, 'समिति को यह जानकर हैरानी हुई कि PoA एक्ट लागू होने के तीन दशक से अधिक समय बाद भी सिर्फ सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे पुलिस स्टेशन हैं। समिति का मानना है कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से स्पेशल पुलिस स्टेशन स्थापित करना जरूरी है। अत्याचार के समय पीड़ित सबसे पहले सुरक्षा के लिए पुलिस स्टेशन जाते हैं। यह माना जाता है कि ये पुलिस स्टेशन ऐसी स्थितियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकेंगे।'संसद में एक सवाल के जवाब में दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार (40), मध्य प्रदेश (51), छत्तीसगढ़ (27), झारखंड (24), कर्नाटक (33), केरल (तीन) और पुडुचेरी (तीन) में कुल 181 स्पेशल पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं।
यह अंतर उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खास तौर पर चौंकाने वाला है। वहां SC और ST के खिलाफ अत्याचार के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए जाते हैं। लेकिन, ऐसे मामलों के लिए कोई खास स्पेशल पुलिस स्टेशन नहीं हैं।


