अगले हादसे का इंतजार क्यों?
2020 से 2024 के बीच भारत में इमारत गिरने, आग लगने और गड्ढों या मैनहोल में गिरने जैसी घटनाओं में करीब 33,000 लोगों की मौत होने का सरकारी आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है। इनमें बड़ी संख्या शहरी इलाकों की बताई गई है। ऐसे में चुनौती सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि उससे पहले खतरे को पहचानने की है।- शहरों को नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट, अवैध निर्माण की शुरुआती स्तर पर रोकथाम, इमारतों के इस्तेमाल में अनधिकृत बदलाव की निगरानी और समयबद्ध रीडेवलपमेंट की जरूरत है।
- सत्य निकेतन की घटना को सिर्फ एक हादसा मानकर छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं होगा। यह उन तमाम इमारतों के लिए चेतावनी है, जहां खतरा सामने दिखाई देने के बावजूद लोग आज भी रहने को मजबूर हैं।


