भारत कभी भी बातचीत और कूटनीति से पीछे नहीं हटा है...जब तक कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ बर्ताव नहीं करता है, छद्म युद्ध, आतंकवाद के जरिए भारत पर हमले नहीं कराता। इसलिए अगर पाकिस्तान भारत को टारगेट करना बंद करता है, अच्छे बर्ताव करता है, छद्म युद्ध बंद करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करता है, मुझे लगता है कि भारत नए समझौते के लिए बातचीत की मेज पर बैठने के लिए तैयार होगा।
सिंधु जल समझौते से 10 बड़ी बातें
- सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ।
- बाद में इस संधि के संचालन के लिए विश्व बैंक ने मध्यस्थ के रूप में प्रवेश किया।
- समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलज का पानी भारत के हिस्से में आया, जो मात्र 19.48 फीसदी होता है।
- तीनों महत्वपूर्ण पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी पाकिस्तान के खाते में डाल दिया गया, जो कि 80 फीसदी से ज्यादा है।
- पश्चिमी नदियों पर भारत का अधिकार नाम मात्र का रह गया, जिसमें पाकिस्तान जब चाहे परेशानी खड़ा कर सकता था।
- बाद में आपसी विवाद को सुलझाने के नाम पर विश्व बैंक ने परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन बना दिया, जिसे न तो भारत ने कभी मान्यता दी और न ही उसकी कार्रवाइयों में हिस्सा लिया।
- सिंधु जल समझौते के शुरुआत से पाकिस्तान ने कभी भी उसको मिले पानी के हिस्से का पूर्ण उपयोग नहीं किया और ज्यादातर हिस्सा बहकर समुद्र में गिरकर बर्बाद होता रहा।
- ठीक उलट भारत ने जब भी सीमित मिले हिस्से के पानी के भी बेहतर उपयोग की कोशिशें कीं तो पाकिस्तान ने समझौते के नाम पर उसमें अड़ंगा डाला।
- सिंधु जल संधि की बुनियाद ही सद्भावना की नीयत से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने बदले में शुरू से ही भारत पर युद्ध थोपे, छद्म युद्ध लड़ता रहा और आतंकवादियों के दस्ते भेजकर भारत में बड़ी-बड़ी आतंकवादी वारदातों को अंजाम देता रहा।
- 22 अप्रैल, 2025 को जब जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने 25 सैलानियों की धर्म पूछकर बेरहमी से हत्या कर दी और एक घोड़े वाले को भी मार डाला तब भारत ने सिंधु जल समझौते पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया।


