एक खांचे में बंद करना भूल
दिल्ली यूनिवर्सिटी में देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा पढ़ने आते हैं। इसलिए इन नतीजों को BJP देश भर के युवाओं की पसंद और उनके फैसले के तौर पर दिखा रही है। खासकर अगले साल होने वाले यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव से पहले ये नतीजे नैरेटिव बनाने के लिए अहम हैं। वैसे तो इन तीनों राज्यों की राजनीति अलग है, लेकिन युवाओं के लिए रोजगार, भर्ती परीक्षा और शिक्षा के सवाल सभी जगह अहम हैं। Gen Z BJP के साथ है या कांग्रेस के खिलाफ, यह नैरेटिव के लिए तो सही है लेकिन इसका कोई सीधा जवाब नहीं है।सवाल यह है कि युवा जिन मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, क्या राजनीतिक दल उन्हें सुनने के साथ उनका भरोसा भी जीत पा रहे हैं? डीयू में ABVP की जीत NSUI की हार और निर्दलीय की सफलता एक ही बात कहती है- युवाओं को किसी एक राजनीतिक खांचे में बंद करके पढ़ना भूल हो सकती है।


