नेपाल के हिंदू PM बालेन शाह नई मुश्किल में घिरे, ईसाइयों ने बद्दुआ की धमकी देकर मांगा 'इंसाफ'
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28-04-2026 06:12 PM
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह बीते कुछ समय से लगातार चर्चा में है। अपने मंत्रियों पर आरोपों को लेकर घिरे बालेन शाह अब एक नए विवाद में फंस गए हैं। इसकी वजह उनकी सरकार की ओर से चलाया जा रहा कथित अतिक्रमण हटाने का अभियान है। नेपाल की बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने भक्तपुर की मनोहरा बस्ती में कई घरों और इमारतों को अवैध बताकर गिराया। इस दौरान एक चर्च भी कर्मचारियों ने तोड़ दिया, जिसने ईसाईयों को नाराज कर दिया है।
सरकार के कर्मचारियों ने अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान एक चर्च को गिराया है। रविवार को इस चर्च को गिराया गया। इसकी जानकारी सामने आने पर ईसाई संगठनों में भारी गुस्सा है। ईसाई कार्यकर्ताओ ने कहा कि अगर चर्च के लिए कोई दूसरी जगह नहीं दी गई तो अच्छा नहीं होगा।ईसाई कार्यकर्ताओं ने चर्च गिराने के लिए बालेन शाह के साथ 'अशुभ' होने की धमकी दी है।
'बालेन शाह के लिए अशुभ होगा'
ईसाईयों के संगठन की ओर से कहा गया है कि हम इस बात से सहमत हैं कि जिस जमीन पर चर्च बना था, वह चर्च की नहीं है। इसके बावजूद सरकार को यह समझना चाहिए कि चर्च कोई इंसान नहीं है। यह एक धार्मिक स्थल है और धर्म की संस्था के साथ सरकार को ऐसे पेश नहीं आना चाहिए था। धार्मिक स्थल को इस तरह से तोड़ा जाना गलत है।बयान में कहा गया है कि नेपाल में लाखों लोग ईसाई धर्म को मानने वाले हैं। चर्च को गिराया जाना सीधे-सीधे ईसाई समुदाय पर एक हमला है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री बालेद्र शाह पाप और धर्म की परवाह करते हैं तो उन्हें तुरंत ईसाईयों की धार्मिक संस्थाओं के लिए सही इंतजाम करना चाहिए। वरना यह उनके लिए बहुत अशुभ होगा।
'ईसाईयों का दिल दुखाया गया'
नेपाल के मनोहर भजन मंडल (चर्च) के सचिव मुक्तिराज राय ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान जारी किया है। राय ने अपने बयान में कहा, 'चर्च को गिराने के बाद यह फैसला किया जाना चाहिए था कि उसे कहां शिफ्ट किया जाना है। मनोहरा बस्ती के 45 फीसदी निवासी ईसाई हैं। चर्च गिराए जाने के बाद ये ईसाई पूजा करने के लिए कहां जाएंगे।'
नेपाल में इस साल हुए चुनाव के बाद बालेन शाह सरकार में आए हैं। बीते महीने के आखिर में शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। हालांकि सरकार के गठन के बाद पहले महीने में ही उनको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उनके दो मंत्रियों में इस्तीफा देना पड़ा है। वहीं भारत बॉर्डर से लगे इलाकों में कस्टम नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
बालेन के सामने मुश्किल
नेपाल का पीएम बनने के बाद उनके सामने एक बड़ा मुद्दा मंत्रियों पर आरोपों का रहा है। उनके गृह मंत्री सुदन गुरुंग को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। उनको मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोपों के चलते उनको इस्तीफा देना पड़ा है। इससे पहले बालेन सरकार में श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।बालेन शाह सरकार के खिलाफ भारत से सटे इलाकों में गुस्सा देखा गया है। इसकी वजह बालेन सरकार का वह फैसला है, जिसमें भारत से 100 रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) चुकाना अनिवार्य किया गया है। इस नियम को सख्ती से लागू करने के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। इसके अलावानेपाल में ईंधन की कीमतेंतेजी से बढ़ोत्तरी ने सरकार को मुश्किल में डाला है।
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