हिंद महासागर में परमाणु किला... INS अरिहंत, हाइपरसोनिक मिसाइलें, भारत के न्यूक्लियर पनडुब्बी स्ट्रैटजी से घबराया पाकिस्तान
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15-09-2025 12:49 PM
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान कि किसी भी आक्रामकता को सिरे से खत्म करने के लिए भारत तेजी से न्यूक्लियर डेटरेंस स्ट्रैटजी को अपना रहा है। भारत की तैयारियों को देखते हुए पाकिस्तान परेशान हो रहा है। भारत की सेकंड न्यूक्लियर डेटरेंस स्ट्राइक काबिलियत से पाकिस्तान घबराया नजर आ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में भारत के हिंद महासागर में न्यूक्लियर डेटरेंस पर काफी बात हो रही है। पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून में भारत की हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर डेटरेंस को लेकर लंबा चौड़ा लेख लिखा गया है, जिससे पाकिस्तान की घबराहट का पता चलता है।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का दावा है कि हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति अब Continuous at Sea Deterrence यानि (CASD) के इर्द-गिर्द घूम रही है। इस स्ट्रैटजी का मतलब है कि हर वक्त कम से कम एक न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) समंदर के अंदर तैरती रहेगी। यानि, भारत अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है और हर वक्त सेकंड स्ट्राइक क्षमता तैयार रखना चाहता है।
हिंद महासागर में भारत की न्यूक्लियर स्ट्राइक क्षमता पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्ट्रैटजी के साथ भारत अपने दुश्मनों को ये संदेश देता है कि किसी भी परमाणु हमले से पहले वो सौ बार सोचे, क्योंकि भारत का फिर तत्काल न्यूक्लियर हमला होगा। पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि अटैकिंग स्ट्रैटजी अपना रहा है। 2016 में आईएनएस अरिहंत की कमीशनिंग से लेकर 2024 में आईएनएस अरिघाट के शामिल होने तक, भारत ने अपने समुद्री कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया है। भारत फिलहाल S-4 और S4 SSBN का भी परीक्षण कर रहा है। इसके साथ ही 13,500 टन विस्थापन वाली नई S5 क्लास SSBN को भी डेवलप किया जा रहा है, जो भारत की लंबे समय की स्ट्रैटजी को दिखाता है।रिपोर्ट के मुताबिक इन पनडुब्बियों को भारत की K-सीरीज मिसाइलों से जोड़ा जा रहा है। K-15 (750-1,500 किमी) पहले से ही सर्विस में है। K-4 (3,500-4,000 किमी) का टेस्ट हो चुका है, जबकि K-5 (5,000+ किमी और MIRVs से लैस) और K-6 (8,000 किमी हाइपरसोनिक क्षमता) को फिलहाल भारत डेवलप कर रहा है। ये सभी विनाशक मिसाइलें हैं, जो भारत की सेकंड न्यूक्लियर स्ट्राइक का हिस्सा है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि भारत सोवियत संघ के जमाने की स्ट्रैटजी अपना रहा है और दुश्मनों के हमले से बचने के साथ साथ जवाबी हमला करने की रणनीति अपना रहा है। यानि भारत ने समुद्र में भारी किलाबंदी शुरू कर दी है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि भारत, बंगाल की खाड़ी में भी यही स्ट्रैटजी अपना रहा है।
'समंदर को परमाणु किले में तब्दील कर रहा भारत' पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट इस्कंदर रहमान ने अपनी किताब "मर्करी वाटर्स: नेवल न्यूक्लियर डायनेमिक्स इन द इंडियन ओशन" में लिखा है कि यह भौगोलिक स्थिति भारतीय SSBN को भीड़भाड़ वाले अरब सागर की तुलना में ज्यादा गुप्त रूप से युद्धाभ्यास करने की अनुमति देती है। इसी रणनीति के मुताबिक निर्माणाधीन भूमिगत पनडुब्बी बेस, प्रोजेक्ट वर्षा, भारत की लगातार प्रतिरोध क्षमता को और मजबूत करेगा। आपको बता दें कि प्रोजेक्ट वर्षा के तहत विशाखापत्तनम में भारत अपना सीक्रेट नेवल बेस बना रहा है। यह एक अंडरग्राउंड पनडुब्बी बेस है, इससे भारत को लगातार सी-बेस्ड डिटरेंस बनाए रखने में मदद करेगा।
भारत का प्लान 10 से 12 परमाणु पनडुब्बियां (SSBNs और SSNs) बनाने की है, जिससे एक साथ चीन और पाकिस्तान का एक साथ मुकालबा किया जा सके। पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि इससे क्षेत्रीय हथियारों की रेस और तेज हो सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का एडवांस एंटी-सबमरीन वारफेयर तकनीक भारत की स्ट्रैटजी का मुकाबला कर सकता है या फिर भारत को काउंटर करने के लिए नए परमाणु विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। लेकिन अचानक किसी तबाही मचाने वाले युद्ध से बचने के लिए नौसैनिक हॉटलाइन बनाने की सलाह दे रहे हैं, जैसा शीतयुद्ध के समय सोवियत संघ और अमेरिका ने किया था।
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