चीन-ईरान को भड़काएंगे ये कदम!
मुनीर और शरीफ ने बलूचिस्तान में अमेरिकी कंपनियों को अनुमति देने के घरेलू और क्षेत्रीय परिणामों पर गंभीरता से विचार नहीं किया है। चीन ने अभी तक इन घटनाक्रमों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि यह तय है कि अपनी सीमा के करीब अमेरिका की संभावित मौजूदगी चीन को नाराज करेगी। इसीलिए उसने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को वापस लेने के अमेरिकी प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ये क्षेत्रीय तनाव पैदा करने की कोशिश है।चीन के लिए मुद्दा यह होगा कि चीनी हितों के लिए सुरक्षा स्थिति में सुधार करने के बजाय पाकिस्तान अमेरिका को इस क्षेत्र में घुसाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अपने लोगों के लिए सुरक्षा की मांग को अनसुना कर दिया है। चीन के अलावा ईरान भी नाराज होगा, क्योंकि वह पहले ही अमेरिका के निशाने पर है। अफगान तालिबान हालांकि वॉशिंगटन से बातचीत के खिलाफ नहीं है लेकिन अमेरिकियों की अपनी जमीन पर वापसी का कड़ा विरोध कर रहा है।
खतरनाक रास्ते पर मुनीर-शरीफ
मुनीर और शरीफ जो प्रस्ताव अमेरिका को दे रहे हैं, उससे पाकिस्तान का कोई पड़ोसी खुश नहीं होगा। पड़ोसी ही नहीं बल्कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में भी इससे गुस्सा बढ़ेगा। पाकिस्तानी सेना को समझना चाहिए कि खैबर पख्तूनख्वा में पहले ही युद्ध जैसे हालात हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लगातार प्रांत में हिंसा कर रहा है।बलूचिस्तान में अलगाववादी अमेरिका को अपने संसाधनों के दोहन की इजाजत नहीं देंगे। वह इसी मुद्दे पर अपने क्षेत्र में चीनियों को निशाना बना रहे हैं। इससे पता चलता है कि मुनीर और शरीफ एक खतरनाक रास्ते पर हैं। यह बलूचिस्तान और केपी को भारी अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच छद्म संघर्ष का मैदान बना सकता है। यह ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि भारत और दूसरे पड़ोसियों के हितों के लिए भी हानिकारक होगा।


