MP में पुलिसकर्मियों के लिए राहत की खबर : अब कोमा, पैरालिसिस और हार्ट अटैक पर भी मिलेगी 14 लाख रुपये की सहायता
Updated on
28-05-2026 11:23 AM
भोपाल। मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद राहत भरी खबर है। अब ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले या कैंसर, किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पुलिसकर्मियों को 'पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना' के तहत अधिकतम 14 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में हुई न्यासी मंडल की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है।
इस नए बदलाव के तहत न केवल सहायता राशि की सीमा को बढ़ाया गया है, बल्कि हार्ट अटैक या गंभीर सड़क दुर्घटना जैसी आपातकालीन स्थितियों में गैर-अनुबंधित या गैर-मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में भी मरीज के स्थिर होने तक कैशलेस इलाज की विशेष सुविधा दी गई है।
प्रदेश में 55 और बाहर 56 अस्पताल अनुबंधित
अभी प्रदेश के अंदर 55 और प्रदेश के बाहर चार निजी चिकित्सालयों सहित कुल 59 अस्पतालों से योजना अंतर्गत अनुबंध किया गया है। यह निर्णय यह भी लिया गया कि आकस्मिक परिस्थितियों, विशेष रूप से हार्ट अटैक एवं गंभीर सड़क दुर्घटना जैसी जानलेवा स्थितियों में यदि उपचार गैर-अनुबंधित अथवा गैर-मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में प्रारंभ करना पड़े, तो मरीज के स्थिर (स्टेबल) होने तक वहां कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सके।
गंभीर मामलों में मिलेगी इलाज की सुविधा
बैठक में यह तय किया गया है कि कानून-व्यवस्था ड्यूटी, अपराध विवेचना के दौरान हिंसा, पुलिस वाहन अथवा किराये के पुलिस वाहनों की दुर्घटना में घायल पुलिसकर्मियों सहित कैंसर, किडनी एवं लीवर ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी जैसे गंभीर उपचार मामलों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बाद शेष राशि का भुगतान पीएचपीएस निधि से किया जाए। साथ ही कोमा अथवा पैरालिसिस की स्थिति में भी सहायता प्रदान की जाएगी।
शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
वर्तमान 50 प्रतिशत अंतर राशि को बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत आश्रित सदस्यों की पात्रता, कैशलेस उपचार की सुविधा, गंभीर बीमारियों के उपचार, आकस्मिक परिस्थितियों में चिकित्सा सहायता तथा उपचार प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
साथ ही अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त पुलिस कर्मचारियों पर आश्रित छोटे भाई-बहनों एवं दिव्यांगजनों को भी योजना का लाभ प्रदान करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया।
अधिक से अधिक शासकीय और मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालयों को योजना से जोड़ने पर बल दिया गया, ताकि पुलिसकर्मियों को अपने जिले अथवा निकटतम क्षेत्र में कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सके।
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