'यमन की गुफाओं से हुकूमत, पोस्टरों में हर जगह', कौन हैं हूती नेता अब्दुल मलिक, जो सऊदी अरब पर पड़े भारी
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17-09-2026 11:37 AM
सना: यमन में बीते करीब एक महीने से हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकार में लड़ाई चल रही है। यमन का बड़ा इलाका पहले से ही हूतियों के नियंत्रण में था। हालिया संघर्ष में बाब-अल-मंडेब तक पहुंच देने वाले तटीय इलाकों पर भी हूतियों का नियंत्रण हो गया है। इस सबमें हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती की खूब चर्चा है। हालांकि वह राजधानी सना या दूसरे इलाकों में नजर नहीं आते हैं। अब्दुल मलिक के बयान या वीडियो मैसेज ही उनके गुट की ओर से जारी किए जाते हैं।
यमन की राजधानी सना में अब्दुल मलिक अल-हूती की तस्वीरें खूब नजर आती हैं। कई जगहों पर बड़ी स्क्रीन पर उनकी तकरीरें चलती हैं। उनके समर्थक हाथों में उनकी तस्वीर वाले बैनर लेकर घूमते हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ऐसा प्रभाव होने के बाद भी अपने नेता को समर्थक खुद सामने से देख ही नहीं पाते। अज्ञात जगह रहने की वजह से वह सिर्फ स्क्रीन पर ही उनको देखते हैं।
पैगंबर के वंशज!
अब्दुल मलिक अल-हूती खुद को पैगंबर का वंशज बताते हैं। वह जैदी शिया परंपरा से जुड़े हैं। अब्दुल मलिक एक दशक से ज्यादा समय से उत्तर-पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती आंदोलन के नेता हैं। वह सार्वजनिक तौर पर सामने आने से बचते हैं। उनकी बैठकें अक्सर गुफाओं या सुरक्षित ठिकानों से वीडियो के जरिए होती हैं।
मलिक के छिपे रहने की मजबूत वजह है। हूती ईरान के सबसे मजबूत और सक्रिय सहयोगी समूहों में हैं। हाल के वर्षों में इजरायल ने लगातार ईरान समर्थित हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों के नेताओं को निशाना बनाया है। इजरायल के खतरे के बावजूद मलिक अल-हूती अब तक सुरक्षित हैं तो इसके पीछे उनके पते की बहुत कम लोगों को जानकारी होना भी है।
अब्दुल मलिक अल-हूती का परिवार
अब्दुल मलिक अल-हूती का जन्म 1980 के आसपास यमन के जैदी शिया समुदाय से जुड़े धर्मगुरु के परिवार में हुआ। 1990 के दशक में उनके बड़े भाई हुसैन अल-हूती ने नेटवर्क बनाया और ईरान से प्रभावित हुए। 1994 में उन्होंने छात्रों को ईरान भेजना शुरू किया। हुसैन ने ही हूती आंदोलन का चर्चित नारा दिया था, 'डेथ टू अमेरिका, डेथ टू इजरायल'।
हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकार के खिलाफ विद्रोह किया। हुसैन मारे गए तो अब्दुल मलिक ने हूती की कमान संभाल ली। गृहयुद्ध के दौरान अब्दुल मलिक अल-हूती मोर्चे पर जाते रहे। उन्होंने हिज्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को आदर्श बनाया और उनकी भाषण शैली अपनाई।
2014 में सना पर कब्जे के वक्त हूतियों के पास सीमित हथियार थे लेकिन ईरान के समर्थन से अब उनके पास एंटी-शिप, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्केट मुताबिक सऊदी ने अमेरिका से हूतियों पर हमला करने को कहा था लेकिन अमेरिका ने इनकार कर दिया था
अब्दुल मलिक के भतीजे अली के पास संगठन की गुप्त पुलिस की जिम्मेदारी है।
मलिक की भतीजी फातिमा जैनबियात नाम की महिला ब्रिगेड का नेतृत्व करती हैं।
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