रूस ने दिया भारत को धोखा, रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती कर लड़ने के लिए भेजा, मोदी-पुतिन की मुलाकात में उठा था मुद्दा
Updated on
11-09-2025 02:07 PM
मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बार फिर भारतीयों के रूसी सेना में शामिल करने और जबरन फ्रंटलाइन पर भेजे जाने का मामला सामने आया है। द हिंदू ने दो भारतीय नागरिकों के हवाले से बताया है कि वे यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में फंस गए हैं, जहां उन्हें रूसी सेना में सेवा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दोनों नागरिकों ने बताया कि उनके साथ कम से कम 13 और भारतीय थे। यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक के दौरान रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का मुद्दा उठाया जा चुका है। पुतिन ने भारत को इस बारे में आश्वासन भी दिया था।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन मोर्चे पर भेजे गए सभी भारतीय पिछले छह महीने में छात्र का विजिटर वीजा पर मॉस्को गए थे। एक एजेंट उन्हें काम का झांसा देकर ले गया था, लेकिन उन्हें युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिया गया। दोनों व्यक्तियों ने यूक्रेन के सेलीडोव से फोन के जरिए अपने बारे में जानकारी दी है। वे वहां एक बिल्डिंग में रह रहे हैं। यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र के प्रमुख शहर सेलीडीव पर रूस ने नवम्बर 2024 नियंत्रण का दावा किया था।
रूसी एजेंट ने झांसा देकर फंसाया
जम्मू निवासी 22 साल के सुमित शर्मा ने बताया कि वह लगभग 6 महीने पहले रूस आए थे और मॉस्को स्टेट लिग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। शर्मा ने हिंदू को बताया कि वह पैसे कमाने के लिए छोटा-मोटा काम ढूढ़ रहे थे, उसी दौरान एक महिला ने उनसे संपर्क किया। महिला ने उनसे निर्माण कार्य दिलाने का भरोसा दिया था। उन्होंने बताया कि उनसे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए और रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। बिना प्रशिक्षण के उन्हें यूक्रेन के कब्जे वाले इलाके में लाया गया और अब जाने नहीं दिया जा रहा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
ताजा मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। इसने कहा कि 'हमने हाल ही में रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती की खबरें देखी हैं। सरकार ने पिछले एक साल में कई मौकों पर इस तरह की कार्रवाई में मौजूद जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है और भारतीय नागरिकों को आगाह किया है। हमने दिल्ली और मॉस्को दोनों जगह पर रूसी अधिकारियों के साथ भी इस मामले को उठाया है और कहा है कि इस प्रथाको रोका जाए और हमारे नागरिकों को रिहा किया जाए। हम प्रभावित परिवारों के संपर्क में हैं।'
रूसी दूतावास ने बीते साल एक बयान में कहा था कि वह अब अपनी सेना में भारतीयों की भर्ती नहीं करता। पीएम मोदी ने जुलाई 2024 में मॉस्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद रूस ने आश्वासन दिया था। विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को ऐसी नौकरी के जाल में फंसने से बचने के लिए सलाह भी जारी करता रहा है।
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