रूस, पुर्तगाल, V4 देश, UNSC में भारत की दावेदारी का बढ़ा समर्थन, फिर क्यों नहीं बन पा रहा स्थायी सदस्य, समझें बाधा
Updated on
27-09-2026 11:37 AM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी को लेकर समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में बोलते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बार फिर भारत के लिए समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि रूस सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील के लिए स्थायी सीट का समर्थन करता है। पुर्तगाल और मॉरीशस ने भी UNGA के मंच से भारत को स्थायी सीट के लिए समर्थन दिया है।
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विसेग्राड ग्रुप (v4) के चार दस्यों ने भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना सामूहिक समर्थन जताया था। इस सप्ताह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने V4 देशों - हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य- के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की थी।
V4 ग्रुप का भी भारत का समर्थन
विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात के दौरान स्लोवोकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि चारों देश इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ के सदस्य और इंडो-पैसिफिक में उभरती ताकत के रूप में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह मिलनी चाहिए।
इन समर्थनों से UNSC में सुधार के लिए भारत की लगातार कोशिशों को बल मिला है। सुरक्षा परिषद में भारत जिन सुधारों की वकालत कर रहा है, उनमें स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सीटों की संख्या बढ़ाना है, ताकि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकाससील देशों को प्रतिनिधित्व मिल सके। लेकिन बढ़ते समर्थन के बावजूद भारत की राह आसान नहीं है।
UNSC में सुधार की तेज हो रही मांग
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गठन 1945 में किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित यह निकाय संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक है, जिसकी मुख्य जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। UNSC में 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। पांच स्थायी सदस्यों को P5 के नाम से जाना जाता है। ये अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस और फ्रांस हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करने वालों का कहना है कि 1945 में बना इसका ढांचा अप्रासंगिक हो चुका है। यह आज की वास्तविक भू-राजनीतिक हकीकत को नहीं दिखाता है। इसमें यूरोप से जहां 3 देश शामिल हैं। वहीं, सबसे बड़े महाद्वीप एशिया से केवल एक देश- चीन- शामिल है। दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत इससे बाहर है। वहीं, अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका से किसी को भी इसमें जगह नहीं दी गई है।
स्थायी सीट पर भारत की दावेदारी
भारत अगले साल होने वाले अस्थायी सीट के दावेदारी भी पेश कर रहा है, लेकिन उसका असल लक्ष्य स्थायी सीट हासिल करना है। स्थायी सीट की मांग के पीछे कुछ प्रमुख बाते हैं। स्थायी सदस्यों में से हर एक को वीटो का अधिकार मिलता है। यानी कोई स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव को रोक सकता है, चाहे सुरक्षा परिषद के बाकी सदस्य उसका समर्थन क्यों न करें।
P5 में चीन को छोड़ सभी का समर्थन
भारत की स्थायी सीट के लिए समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। सुरक्षा परिषद में शामिल रूस,ब्रिटेन और फ्रांस भारत की दावेदारी का खुला समर्थन करते हैं, वहीं अमेरिका सैद्धांतिक रूप से इसके पक्ष में है, लेकिन चीन भारत को स्थायी सदस्य के रूप में नहीं चाहता है। इसके अलावा भारत की सदस्यता वाला G4 समूह है, जो सुधारों का समर्थन करता है। भारत के अलावा इस समूह में ब्राजील, जर्मनी और जापान हैं, जो एक दूसरे की दावेदारी का समर्थन करते हैं।
भारत की राह में बाधा
समर्थन के साथ ही भारत की दावेदारी को विरोध भी है। इसमें पाकिस्तान, तुर्की और इटली की मौजूदगी वाला यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस ग्रुप सबसे प्रमुख है। 12 देशों वाले इस समूह को कॉफी क्लब के नाम से जाना जाता है। UNGA की बैठक के दौरान ही इस समूह ने एक बयान जारी स्थायी सीट बढ़ाए जाने का विरोध किया। इसने नई स्थायी सीटें बनाने की जगह चुने हुए अस्थायी सदस्यों की संख्या पर जोर दिया। समूह ने कहा कि इससे अफ्रीका और विकासशील देशों को प्रतिनिधित्व मिला। समूह ने वीटो पावर को खत्म करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया।
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