Select Date:

ईरान से अमेरिका-इजरायल के युद्ध का असली विजेता तो रूस निकला, पुतिन की बल्ले-बल्ले, अरबों डॉलर का मुनाफा

Updated on 21-03-2026 03:02 PM
लंदन: अमेरिका और ईरान का टकराव दिखाता है कि एक जगह का संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। पिछले महीने 28 फरवरी को हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। हमलों और जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस स्थिति ने दूसरी बड़ी ताकतों को भी अपनी रणनीति बदलने का मौका दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पेचीदा हो गई है।

रूस का आर्थिक फायदा

व्लादिमीर पुतिन के लिए यह टकराव एक अजीब रणनीतिक स्थिति बनाता है। रूस ने हमलों की आलोचना की और ईरान को कुछ खुफिया जानकारी भी दी, मगर वह इसमें सीधे शामिल नहीं हुआ। उसकी प्राथमिकता यूक्रेन है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से पश्चिम का ध्यान बंटा है, जो रूस के लिए फायदेमंद हो सकता है। उसे युद्ध से आर्थिक फायदा हो रहा है। लड़ाई शुरू होते ही तेल की कीमतें बढ़ गईं। इससे रूस की कमाई बढ़ी, क्योंकि उसका तेल भी महंगा बिका। होर्मुज में रुकावट से एशियाई देशों ने नए सप्लायर ढूंढे, जहां रूसी तेल एक आसान विकल्प बन गया और उसका बाजार बढ़ा।

रूस की बढ़ेगी कमाई

यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है। रूस के बजट का 30–45% हिस्सा तेल और गैस से आता है। कीमतें बढ़ने से उसकी अरबों डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो सकती है, जो उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था और यूक्रेन में सैन्य अभियान को मजबूत करेगी। यूरोपियन यूनियन के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने रूस को इस संकट का सबसे बड़ा विजेता बताया। उनका कहना है कि ऊंची ऊर्जा कीमतों से रूस को फायदा मिल रहा है, जबकि संसाधन अलग-अलग मोर्चों पर बंट रहे हैं। हथियार और रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल अन्य जगह होने से यूक्रेन की सुरक्षा भी कमजोर पड़ सकती है।

कीव होगा कमजोर

अमेरिका और इस्राइल के ऑपरेशनों में प्रिसिजन-गाइडेड हथियार, पैट्रियट इंटरसेप्टर और उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है। इनका उपयोग रूस के खिलाफ संघर्ष में यूक्रेन की मदद के लिए किया जा सकता था। अगर इनकी थोड़ी भी कमी हो जाती है, तो कीव का एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे मौके का रूस अपनी अगली सैन्य योजना में फायदा उठा सकता है।

ईरान-रूस और होंगे करीब

भू-राजनीतिक स्तर पर देखें तो यह संकट रूस और ईरान के बढ़ते संबंधों को और मजबूत करेगा। 2025 के समझौते के बाद दोनों के बीच सैन्य और खुफिया सहयोग बढ़ा है। यूक्रेन में रूस ईरानी ड्रोन के बदले खुफिया जानकारी और कुछ मदद भी दे सकता है। कमजोर होती ईरान सरकार रूस पर ज्यादा निर्भर हो सकती है, जिससे पश्चिम एशिया में उसका प्रभाव बढ़ेगा। फिर भी इसे रूस की बड़ी ताकत मानना गलत होगा, क्योंकि वह इन हमलों को रोक नहीं पाया और न ही ईरान की रक्षा कर सका। इससे साफ है कि सहयोग के बावजूद रूस सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहता है।

रिस्क भी कम नहीं

कहा जा रहा है कि यह संकट लंबे समय में रूस के खिलाफ भी जा सकता है। अगर ईरान की सरकार गिरती है या उसे अमेरिका के साथ समझौता करना पड़ सकता है, तो रूस अपना एक अहम सहयोगी खो देगा। बशर अल-असद के कमजोर होने के बाद सीरिया में उसकी स्थिति पहले ही कमजोर चुकी है। साथ ही, हमलों में ईरानी ड्रोन बनाने की फैक्टरियों को नुकसान होने से रूस को मिलने वाली सैन्य सप्लाई भी रुक सकती है।

तात्कालिक फायदे

असल में, रूस तेल से ज्यादा कमाई, पश्चिम का ध्यान बांटकर और ईरान पर असर बढ़ाने जैसे तात्कालिक फायदे लेना चाहता है। उसकी कोशिश सीधे टकराव से भी बचने की है। इसलिए, यह रणनीति जोखिम भरी है। लंबा संघर्ष क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है और रूस के निवेश व प्रभाव को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, अगर अमेरिका-इस्राइल जल्दी सफल होते हैं, तो वेस्ट का ध्यान फिर से यूक्रेन पर जा सकता है।

स्थिति अस्पष्ट

भले ही अभी अलग-अलग रूप से रूस को फायदा मिलता दिख रहा है, लेकिन यह स्थिति हमेशा ऐसी नहीं रहने वाली। इतिहास गवाह है कि बाहरी संघर्ष बड़े देशों को कुछ समय के लिए फायदा देते हैं, पर लंबे समय तक नहीं टिकते। रूस अभी फायदा उठा रहा है, लेकिन क्या वह इसे स्थायी ताकत में बदल पाएगा, यह अभी साफ नहीं है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 22 April 2026
वॉशिंगटन: ईरान के साथ 39 दिन की लड़ाई ने अमेरिका के मिसाइल जखीरे को बड़े पैमाने पर खाली कर दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के हालिया आंतरिक स्टॉक आकलन से…
 22 April 2026
तेहरान: ईरान ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर को अमेरिका का आदमी बताया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब ईरान की सरकारी मीडिया ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल…
 22 April 2026
तेहरान: ईरान के अंदर अमेरिका को लेकर सख्त तेवर हैं और IRGC ने अमेरिका के सामने एक सेकंड के लिए भी झुकने से इनकार कर दिया है। ईरान की 'जैसे को…
 22 April 2026
काठमांडू: नेपाल की बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जनता के कई वर्गों में नाराजगी बढ़ रही है। चुनाव में भारी जीत के बाद सत्ता संभालने वाले बालेन…
 21 April 2026
वॉशिंगटन: ईरान के साथ सीजफायर समझौते पर बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आज (मंगलवार) पाकिस्तान जा सकते हैं। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया…
 21 April 2026
बीजिंग: चीनी नेवी ने सोमवार को विमानवाहक पोत लियाओनिंग को ताइवान जलडमरूमध्य में भेजा है। इस साल की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है, जब चीनी विमानवाहक युद्धपोत इस…
 21 April 2026
काठमांडू: नेपाल में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई बालेन शाह की सरकार पहले महीने में ही मुश्किल में फंस गई है। मार्च के आखिर में प्रधानमंत्री बनने वाले…
 21 April 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता पर आखिरी बातचीत के लिए खुद पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान…
 20 April 2026
रियाद: अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान में हमले शुरू किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमलों में इजरायल और खाड़ी देशो में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल…
Advt.