दोनों देशों में बढ़ेगा तनाव?
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक, सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) ने तनाव को पाकिस्तान में हुए टीटीपी के हमलों से जोड़ा है। सीआरएसएस के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में 2,414 मौतें दर्ज की गईं। अगर यह जारी रहा तो 2025 एक दशक से भी ज्यादा समय का सबसे घातक वर्ष हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान की आर्मी और सरकार पर टीटीपी पर कार्रवाई को लेकर भारी दबाव है।तालिबान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा ने भी अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव को बढ़ाया है। भारत ने काबुल में अपने दूतावास फिर से खोलने और तालिबान शासन के साथ राजनयिक संबंध बढ़ाने की बात कही है। नई दिल्ली के इस कदम से इस्लामाबाद में बेचैनी है। अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी को इस्लामाबाद संदेह की नजर से देखता रहा है।
युद्ध नहीं चाहेंगे दोनों पक्ष
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के काबुल स्थित वरिष्ठ विश्लेषक इब्राहिम बहिस ने अल जजीरा से कहा है कि मुत्तकी का दिल्ली दौरा शायद पाकिस्तानी सेना के बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने की आखिरी वजह बना है। कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता के बाद फिलहाल गोलीबारी लगभग थम गई है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष लंबे समय तक संघर्ष से बचना चाहते हैं।इब्राहीम बहिस ने कहा कि कोई भी पक्ष अपनी सीमाओं पर बड़ी सैन्य वृद्धि नहीं चाहेगा। पाकिस्तान सुरक्षाकर्मियों पर हमलों का सामना कर रहा है। अगर अफगान तालिबान भी हमले करने लगे तो समस्या जटिल हो जाएगी। ऐसे में पाकिस्तान चाहेगा कि कूटनीति के जरिए मसले का हल निकालें। वहीं तालिबान भी किसी नए संघर्ष में जाने से बचने की कोशिश करेगा।


