चाबहार, रूस, तुर्की तक ट्रेन... पाकिस्तान की धरती से ईरानी राष्ट्रपति का बड़ा ऐलान, शहबाज खुश, भारत के लिए बढ़ेगी टेंशन
Updated on
04-08-2025 02:02 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की यात्रा पर पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशिकिआन ने इस्लामाबाद के साथ दोस्ती को बढ़ाने का ऐलान किया है। पाकिस्तान और ईरान के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुआ है ताकि द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाया जा सके। इस नई व्यवस्था के तहत पाकिस्तानी बिजनसमैन अब ईरान के जमीनी रास्ते से यूरोप और रूस तक सामान आसानी से भेज सकेंगे। एक्सपर्ट का कहना है कि समुद्री जहाजों की बजाय जमीनी रास्ते से ज्यादा तेजी से सामान भेजा जा सकता है। माना जा रहा है कि यह सामान इंटरनैशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए भेजा जाएगा जो रूस और यूरोप को भारत के मुंबई बंदरगाह से जोड़ता है। भारत और रूस इसे बढ़ा रहे हैं ताकि सामानों का आसानी आवागमन हो सके। इसमें भारत के बनाए ईरान के चाबहार बंदरगाह की अहम भूमिका होगी।
वहीं चीन का इरादा है कि वह पाकिस्तान के सीपीईसी प्रोजेक्ट को भी इस INSTC कॉरिडोर से जोड़ दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो चीन का मध्य एशिया और खाड़ी देशों में प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। चीन मलक्का स्ट्रेट से अपना व्यापार कम करना चाहता है जहां पर भारत और अमेरिका मजबूत हैं। ईरान और पाकिस्तान ने यह भी तय किया है कि दोनों देश 10 अरब डॉलर तक आपसी व्यापार को ले जाएंगे जो अभी 3 अरब डॉलर का है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद सत्ता संभालने और 12 दिनों तक इजरायल से लड़ाई के बाद पहली बार पाकिस्तान के दौरे पहुंचे हैं।
पाकिस्तान, ईरान और तुर्की रेललाइन में क्या है खास?
पाकिस्तान अमेरिका को खुश करने के लिए ईरान के साथ मध्यस्थता पर फोकस कर रहा है। यही वजह है कि ईरानी राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए खुद शहबाज शरीफ प्रोटोकॉल तोड़कर नूर खान एयरबेस पहुंचे थे। पाकिस्तान इसके जरिए अपने कई मकसद साध रहा है। एक तरफ तो जहां भारत के दोस्त रूस तक सीधे पहुंचने का रास्ता मिल रहा है, वहीं अमेरिका को भी वह खुश करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान ईरान से चाहता है कि वह बलूच विद्रोहियों पर लगाम लगाए। पाकिस्तान का दावा है कि बलूचों को ईरान के रास्ते भारत का समर्थन मिलता है।
पाकिस्तान और ईरान के बीच तुर्की तक रेललाइन बनाने पर सहमति बनी है। यह ट्रेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से तेहरान के रास्ते तुर्की के इस्तांबुल तक जाएगी। यह पूरी रेललाइन 6,540 किमी की होगी। इस सफर को पूरा करने में 10 दिन मात्र लगेंगे। इससे पहले समुद्री रास्ते से 21 दिन जहाजों को लगता था। इस रेल रास्ते का 1990 किमी हिस्सा पाकिस्तान, 2603 किमी हिस्सा ईरान और 1950 किमी तुर्की में पड़ेगा। इस परियेाजना को सबसे पहले साल 2009 में शुरू किया गया था लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
ईरान को लालच दे रहे हैं चीन और पाकिस्तान
पाकिस्तान चाबहार के आसपास अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है जहां भारत ने पोर्ट बना रखा है। यही नहीं ग्वादर और चाबहार को पाकिस्तान और चीन जोड़ना चाहते हैं। यह भारत के लिए खतरे की घंटी तरह से है। ईरानी राष्ट्रपति को पाकिस्तान ने सिल्क रूट का लालच दिया है। साथ ही ग्वादर और चाबहार के बीच समुद्री व्यापार को बढ़ाने पर बातचीत की है। ग्वादर पोर्ट को चीन ने बनाया है। यहां नेवल बेस भी बना रहा है।
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