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तुर्की को सता रहा इजरायली हमले का डर, कतर के बाद अगला नंबर? NATO देश एर्दोगन को नेतन्याहू के क्रोध से बचा पाएंगे?

Updated on 16-09-2025 02:55 PM
तेल अवीव/अंकारा: अमेरिका की सुरक्षा गारंटी के बावजूद इजरायल ने कतर पर हमला कर दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका ने कतर में इजरायली हमले को रोकने के लिए कुछ नहीं किया। जिससे सबसे ज्यादा अब कोई देश डरा हुआ है तो वो तुर्की है। इजरायल ने साफ साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि हमास के नेता दुनिया के किसी भी कोने में मौजूद हों, वो उन्हें नहीं बख्शेगा। जबकि कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने दोहा में हमास नेताओं पर इजरायली हमले के बाद इस्लामिक देशों से एक सामूहिक क्षेत्रीय प्रतिक्रिया देने का आह्वान किया है।

हालांकि वाइट हाउस ने कहा है कि उसने इजरायली फाइटर जेट के हमले से पहले कतर को आधिकारिक तौर पर हमले की जानकारी दे दी थी। बावजूद इसके कतर एयरफोर्स, जिसके पास राफेल, एफ-16 जैसे फाइटर जेट और घातक अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम हैं, उसने इजरायली विमानों को हवा में ही मारने के लिए कुछ भी नहीं किया। डिफेंस एक्सपर्ट सबसे ज्यादा हैरान इसी बात से हैं। उनका कहना है कि कतर चाहता तो कई इजरायली विमानों को हमला करने से पहले ही मार सकता था। खैर इन सब बातों से अलावा तुर्की को डर इस बात को लेकर है कि अगर कहीं इजरायली हमला होता है तो वो क्या करेगा?
कतर में हमले के बाद इजरायल के खिलाफ तीव्र प्रतिक्रिया
कतर के प्रधानमंत्री थानी ने वाइट हाउस के उस दावे का खंडन किया है। मंगलवार देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पत्रकारों को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने इजरायली हमला शुरू होने के 10 मिनट बाद तक उनसे संपर्क नहीं किया था, जबकि दोहा में धमाकों की आवाज गूंज रही थी। थानी ने कहा, "हमारा मानना है कि आज हम एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। इस तरह की बर्बर कार्रवाइयों का पूरे क्षेत्र से जवाब होना चाहिए।" इस घटना की गूंज खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में भी सुनाई दे रही है, जो कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान और बहरीन का एक समूह है
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के पूर्व सलाहकार अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने कहा कि यह घटना खाड़ी देशों को "कई सवालों का सामना करने के लिए मजबूर करेगी जिन पर बहुत सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है"। जीसीसी के सदस्यों में, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता वाले अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य कर लिए थे, लेकिन अन्य मुस्लिम देशों ने अभी तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है। कतर, हमास और इजरायल के बीच मध्यस्थ की भूमिका में है और हमास के नेता मध्यस्थता बैठक से लिए ही दोहा पहुंचे थे, जब उनपर हमला किया गया। पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार कतर पर हमला हुआ है। इससे पहले ईरान ने भी कतर में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया था।
क्या कतर के बाद तुर्की पर हमला करेगा इजरायल?
दोहा में हुए हमले के बाद तुर्की में चिंता गहरा गई है कि कहीं अगला निशाना वही न बन जाए। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रियर एडमिरल जेकी आकतुर्क ने कहा कि "इजरायल अपने लापरवाह हमलों का दायरा बढ़ाकर पूरे क्षेत्र को तबाही में झोंक सकता है।" आपको बता दें कि इजरायल और तुर्की कभी मजबूत साझेदार थे, लेकिन 2000 के दशक के अंत से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ते गए और गाजा युद्ध के बाद तो ये संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे और हमास के समर्थक रहे हैं और उन्होंने गाजा युद्ध की शुरुआत से ही इजरायल और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की है। उन्होंने गाजा हमले को जनसंहार कहा है। इसके अलावा हमास के नेता अकसर तुर्की का दौरा करते रहते हैं। कई हमास नेता अब तुर्की में ही बस चुके हैं। इजरायल ने कई बार इसके लिए तुर्की पर आतंकवादियों का समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। तुर्की, हमास नेताओं को भारी भरकम फंड भी देता है। इसीलिए अब सबसे ज्यादा डर तुर्की को ही है।

कतर की राजधानी दोहा पर हमला यह भी दिखाता है कि इजरायल, अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने में किसी अंतरराष्ट्रीय नियम-कानून या हवाई क्षेत्र की बाधा की परवाह नहीं कर रहा है। तुर्की को डर है कि ऐसी मिसाल अब उसके खिलाफ भी बन सकती है। हालांकि नाटो की सदस्यता की वजह से तुर्की को कुछ राहत जरूर दे रहा है, लेकिन फिर भी इजरायल को वो नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है। तुर्की की सेना नाटो में अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी है और उसका डिफेंस इंडस्ट्री भी लगातार आधुनिक हो रहा है। ईरान पर इजरायली हमले के बाद एर्दोगन ने अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को मिसाइलों का भी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा था... लेकिन एर्दोगन के लिए दिक्कत ये है कि अगर वाकई इजरायल हमला कर देता है, तो फिर तुर्की इसका किस तरह से जवाब देगा?

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