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शेख हसीना को वापस जाना होगा बांग्लादेश? मोहम्मद यूनुस के बयान से प्रत्यर्पण पर छिड़ी नई बहस, भारत क्या करेगा

Updated on 06-09-2024 05:09 PM
ढाका: बांग्लादेश के पीएम पद से इस्तीपा देने के बाद 5 अगस्त को भारत आईं शेख हसीना के प्रत्यर्पण का सवाल लगातार उठ रहा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद यूनुस के बयान के बाद ये सवाल एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। यूनुस ने अपने हालिया बयान में कहा है कि भारत में कोई भी हसीना के रुख से सहज नहीं है, क्योंकि हम उन्हें वापस लाना चाहते हैं। वह भारत में हैं और कभी-कभी बोलती रहती हैं, जो कि ठीक नहीं है। वह चुप रहतीं तो हम भूल जाते लेकिन भारत में बैठकर वह बोल रही हैं। यह किसी को यह पसंद नहीं है। यह हमारे लिए या भारत के लिए अच्छा नहीं है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनुस शेख हसीना के 13 अगस्त के बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रम की जांच की माग की थी। यह अब तक हसीना की ओर से आया एकमात्र बयान है। इसे उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय के एक्स हैंडल से शेयर किया गया था। यूनुस के बयान के बाद पूछा जा रहा है कि क्या हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

हसीना को प्रत्यर्पित किया जा सकता है?


बांग्लादेश सरकार चाहे तो भारत से उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध कर सकता है। दोनों देशों ने 2013 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। साल 2016 में इस संधि में कुछ बदलाव भी किए गए। संधि में कहा गया है कि दोनों देशों को ऐसे व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करना चाहिए 'जिनके खिलाफ कार्यवाही की गई है या जो प्रत्यर्पण योग्य अपराध करने के लिए दोषी पाए गए हैं, या वांछित हैं। संधि उन लोगों के लिए प्रत्यर्पण की अनुमति देती है, जिन पर ऐस आरोप है, जिनमें कम से कम एक साल की जेल की सजा हो सकती है। ये अपराध भारत और बांग्लादेश दोनों में दंडनीय होना चाहिए।

शेख हसीना के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, वो गंभीर हैं। उन पर हत्या के भी मुकदमे हुए हैं। ऐसे में इन आधारों पर उनको प्रत्यर्पित किया जा सकता है लेकिन संधि का ही एक नियम इसमें पेंच भी फंसाता है। संधि में एक प्रावधान है, जो कहता है कि अगर अपराध 'राजनीतिक प्रकृति के हैं तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। जाहिर है कि हसीन राजनीतिक शरण का दावा कर सकती हैं। इसके अलावा सरकार का रुख भी इसमें बेहद अहम हो जाता है।

भारत सोच समझकर उठाएगा कदम


संधि के अनुच्छेद 7 में कहा गया है कि प्रत्यर्पण के अनुरोध को सामने वाले देश अस्वीकार कर सकता है। शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने के मुद्दे पर भारत की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में एक सवाल के जवाब में कहा था कि यह मुद्दा अभी 'काल्पनिक दायरे में' है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कोई भी कदम उठाने से पहले अपने हितों को ध्यान में रखेगा। संधि की कानूनी बातें मायने नहीं रखतीं। एक्सपर्ट का मानना है कि बांग्लादेश में अभी अंतरिम सरकार है। इसके बयानों से भारत को बहुत परेशानी नहीं होनी चाहिए। यह एक नियमित सरकार है, जिसके साथ भारत लंबे समय तक जुड़ना चाहेगा और इस तरह इस पर ध्यान देगा। साथ ही अभी तक केवल एफआईआर दर्ज की गई हैं। मामले की जांच करनी होगी, आरोपपत्र दाखिल करना होगा और फिर अदालत संज्ञान लेगी। अगर हसीना को दोषी पाया जाता है तो फिर प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर बात होगी। बहुत मुमकिन है कि तब तक हालात काफी कुछ बदल चुके हों।

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