रायसेन के रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में आने वाले नीलगढ़ गांव में शनिवार रात प्रस्तावित ‘नीलगढ़ उत्सव-विशाल सहारा लहंगी-डंडा प्रतियोगिता’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
कार्यक्रम में डीजे, लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल से वन्यजीवों को परेशानी होने की आशंका जताई गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही गई है।
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने आयोजन को वन्यजीव संरक्षण के नियमों के विपरीत बताते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है।
उन्होंने कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाने, आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करने और कथित लापरवाही बरतने वाले वन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
प्रवेश शुल्क ₹501, विजेता को ₹15,001 तक का इनाम
अजय दुबे के अनुसार, रायसेन जिले की सुल्तानपुर तहसील के नीलगढ़ गांव में 24 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजे से ‘नीलगढ़ उत्सव-विशाल सहारा लहंगी-डंडा प्रतियोगिता’ आयोजित करने की घोषणा की गई है।
कार्यक्रम के प्रचार के लिए जारी पंपलेट में प्रवेश शुल्क ₹501 और विजेताओं के लिए ₹15,001 तक के नकद पुरस्कार का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि रात के समय होने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने, वाहनों की आवाजाही बढ़ने और डीजे व लाउडस्पीकर बजने से आसपास के वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं।
पंपलेट में आयोजन से जुड़े आयोजक और सहयोगी के रूप में वन ग्राम नीलगढ़, धुंधवानी तथा वन समिति की सहभागिता दर्शाए जाने की बात भी कही गई है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का आरोप
अजय दुबे ने अपनी शिकायत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धाराओं 27, 28, 31 और 38(O) का हवाला देते हुए आयोजन को नियमों के विपरीत बताया है।
उनका आरोप है कि टाइगर रिजर्व के संवेदनशील कोर क्षेत्र में रात के समय शोरगुल वाला कार्यक्रम आयोजित करना वन्यजीवों की शांति और प्राकृतिक आवास के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने NTCA के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाघों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में तेज आवाज, रात्रिकालीन गतिविधियों और भारी भीड़ से वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
इसी आधार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आयोजन की अनुमति और वैधानिक स्थिति की जांच करने की मांग की है।
हालांकि, आयोजन के संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जारी हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए कानून के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही हो सकेगी।
वन अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
शिकायतकर्ता ने भोपाल वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) और औबेदुल्लागंज वनमंडल के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।
दुबे का कहना है कि कार्यक्रम के पोस्टर और पंपलेट खुलेआम वितरित किए गए, इसके बावजूद आयोजन को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।उन्होंने अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।
NTCA और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी शिकायत
अजय दुबे ने सदस्य सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), नई दिल्ली; प्रमुख सचिव, वन विभाग; प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (HoFF); तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन को शिकायत भेजने की बात कही है।
शिकायत में उन्होंने नीलगढ़ में प्रस्तावित रात्रिकालीन कार्यक्रम पर तत्काल संज्ञान लेने, आयोजन की वैधानिक स्थिति की जांच कराने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
आयोजन रोकने और आयोजकों पर केस दर्ज करने की मांग
दुबे ने मांग की है कि 24 अक्टूबर की रात प्रस्तावित कार्यक्रम में डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल तथा भारी भीड़ के जमावड़े को पुलिस और वन विभाग की मदद से रोका जाए। उन्होंने आयोजनकर्ताओं और कथित रूप से नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग भी की है।
इसके अलावा, उन्होंने कार्यक्रम को समय रहते नहीं रोकने और कथित तौर पर लापरवाही बरतने वाले वन अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। अब मामले में संबंधित वन अधिकारियों और प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।