नरेश जमुना की तबीयत बिगड़ने पर उसे डॉक्टर के पास ले गया था। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नरेश ने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी उसे शव वाहन नहीं मिला।
मजबूरन नरेश, अपने पड़ोसी की बाइक पर पत्नी के शव को रखकर घर लेकर आया। मुंद्राजोर CHC से लेकर ओडियापाली गांव की दूरी लगभग 5 किमी है।
शनिवार 4 जुलाई को हुए इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें नरेश पत्नी के शरीर को चादर से ढंककर बाइक पर लेकर जाता दिख रहा है।
नरेश ने पत्नी का पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया, भोज देना पड़ता
नरेश छत्रिया की घटना को देखकर इसकी तुलना दाना माझी की घटना से की जा रही है। दरअसल आज से ठीक 10 साल पहले अगस्त 2016 में ओडिशा के कालाहांडी में दाना माझी अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाकर 10 किमी तक पैदल चले थे। उनके साथ छोटी सी बेटी भी थी।
इस घटना की तस्वीरें और वीडियो पूरे देश में वायरल हो गए। इसे गरीबी, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शव-वाहन व्यवस्था की विफलता बताया गया था।
घटना के बाद ओडिशा सरकार ने जांच के आदेश दिए। शव-परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महाप्रयाण योजना जैसी मुफ्त शव-वाहन सेवाएं भी शुरू की गई थीं।